मौलिक अधिकारों की किन्हीं चार विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

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मौलिक अधिकारों की विशेषता- मौलिक अधिकारों की प्रमुख चार विशेषताएं निम्न प्रकार हैं

  1. मौलिक अधिकार व्यावहारिक सिद्धान्तों पर आधारित होने के कारण सम्पूर्ण समाज के लिए बहुत आवश्यक एवं उपयोगी हैं; उदाहरण के लिए, धार्मिक स्वतन्त्रता के अधिकार की व्यवस्था इस आधार पर की गई है कि समाज में प्रत्येक वर्ग द्वारा धार्मिक सहिष्णुता की भावना को प्रोत्साहन प्राप्त हो।
  2. भारतीय संविधान द्वारा प्रदान किए गए मौलिक अधिकार असीमित नहीं हैं, वरन् संविधान द्वारा उन पर उचित तथा विवेकपूर्ण प्रतिबन्धों की व्यवस्था की गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने पुलिस शक्ति के सिद्धान्त के आधार पर राज्य को समान हित में मौलिक अधिकारों पर आवश्यक, विवेकपूर्ण एवं तर्कसंगत नियन्त्रण लगाने की शक्ति प्रदान की है।
  3. यदि मौलिक अधिकारों के विरुद्ध केन्द्रीय अथवा राज्य की व्यवस्थापिका द्वारा कोई कानून पारित किया जाता है तो उसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है तथा सर्वोच्च न्यायालय को उसे अवैध घोषित करने की शक्ति प्राप्त है।
  4. भारत के संविधान में वर्णित मौलिक अधिकार विश्व के अनेक संविधानों में निहित मौलिक अधिकारों से बहुत अधिक विस्तृत हैं। अधिकारों के इतने अधिक व्यापक होने का एक प्रमुख कारण यह रहा है कि प्रत्येक अधिकार के साथ प्रतिबन्धों की भी व्यवस्था की गई है।

प्रश्नावली तथा अनुसूची अथवा परख सूची क्या है ?

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