यूरोप के निरंकुश राजतन्त्रों के विकास का वर्णन कीजिए।

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यूरोप के निरंकुश राजतन्त्रों के विकास

इंग्लैण्ड

इंग्लैण्ड में निरंकुश राजतंत्र की स्थापना ट्युडर राजवंश (1485-1603) के शासनकाल में हुई। इस राजवंश के पहले राजा हेनरी सप्तम (1485-1509) ने गद्दी के पुराने दावेदारों का दमन किया और गुलाबों के युद्ध के कारण अशांत और उपद्रवग्रस्त वातावरण को समाप्त कर कानून और व्यवस्था की शुरूआत की। गुलाबों के युद्ध तथा अन्य सामन्ती युद्धों में लड़कर बड़े-बड़े सामन्ती परिवारों ने अपने को बरबाद कर लिया और राजा की निरंकुश सत्ता का मार्ग प्रशस्त किया। हेनरी सप्तम ने ‘वर्दी और अनुरक्षण’ (Livery and Maintenance) के विरुद्ध कानून पास कर उस प्रथा को समाप्त किया जिसके द्वारा बड़े-बड़े सामन्त व्यक्ति सेना रखते थे। चूँकि सामान्य कानून शांति और सुरक्षा बनाए रखने में असफल रहा, इसलिए हेनरी सप्तम् ने सम्पत्ति सम्बन्धी विवादों को दूर करने और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए नए तरह की आदालतों की स्थापना की। इस क्षेत्र में स्थापित पहली अदालत का नाम था कोर्ट ऑफ स्टार चैम्बर।

इसने रोमन सिद्धान्तों पर काम किया, सिर्फ राजा की सत्ता का प्रतिनिधित्व किया, सबूत के मामलों में रोमन नियमों का पालन किया और ज्यूरी प्रथा का अंत किया। शुरू में निरंकुश तंत्र के उपकरण के रूप में इसकी आलोचना हुई, लेकिन बाद में यह लोकप्रिय हुआ, क्योंकि इसने व्यवस्था और न्याय की स्थापना की। हेनरी सप्तम् को एक लोकप्रिय शासक के रूप में स्वीकार किया गया। ट्यूडर राजघराने के नाम पर इंग्लैण्ड में राष्ट्रीय भावना का सुदृढ़ीकरण हुआ। मध्यमवर्ग का समर्थन प्राप्त कर उसने न केवल सामन्तों की शक्ति का दमन किया, बल्कि राष्ट्रीय सम्पन्नता और शक्ति के विकास में महान योगदान दिया। हेनरी अष्टम और एलिजाबेथ ने तो ट्यूडर निरंकुश तंत्र को और राष्ट्रीय राज्य के रूप में इंग्लैण्ड को उच्चतम शिखर तक पहुँचा दिया था।

फ्रांस

फ्रांस में आधुनिक राष्ट्रीय राज्य की स्थापना लुई XI (1461-83) के शासनकाल में हुई। पिछले पाँच शताब्दियों से जबसे पहला फ्रांसीसी राजा गद्दी पर बैठा था, तबसे राजा का क्षेत्राधिकार विरासत, वैवाहिक सम्बन्ध, युद्ध, षड्यंत्र और सैनिक विजयों के मिलजुले प्रयास से अपने मूल केन्द्र से बाहर की ओर फैलता रहा। तुई XI ने सीमा विस्तार की नीति को जारी रखा। देश के अंदर उसने शाही सेना का निर्माण किया, उपद्रवियों और विद्रोही कुलीनों का दमन किया। संसदीय सहमति के बिना कर इकट्ठा करने में वह इंग्लैण्ड के ट्यूडर राजाओं से भी आगे बढ़ गया था। उसके शासनकाल में स्टेट्स जेनरल की बैठक सिर्फ एक बार हुई। पिछली अव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्टेट्स जेनरल के सदस्यों ने राजा से आग्रह किया कि वह भविष्य में स्टेट्स जेनरल के बिना शासन करे। अब राजा ने स्वयं कानून बनाया स्थायी सामन्तों की जगह, सरकारी अधिकारियों की प्रतिष्ठा को सुदृढ़ बनाया और विभिन्न शहरों के स्थानीय चार्टर अधिकारों को समाप्त किया। पादरियों पर राजा ने व्यापक अधिकार स्थापित किए। 1438 ई. के प्रेगनैटिक सैंक्शन (Pragmatic Sanction) के द्वारा गैलिकन चर्च को काफी राष्ट्रीय स्वतंत्रता प्राप्त हो चुकी थी।

1516 ई. में राजा फ्रांसिस प्रथम ने पोप लियो x के साथ एक समझौता किया जिसे बोलोग्ना का कंकोरवा कहते हैं। इस समझौते के अनुसार प्रेमैटिक रक्शिन को रद्द कर दिया गया, पोप को फ्रांसीसी चर्च से आर्थिक आय प्राप्त होने लगी और राजा ने विशेप और एबॉट नियुक्त करना शुरू किया। इस प्रकार, 1516 ई. से ही फ्रांस के राजा ने अपने राष्ट्रीय पादरियों पर नियंत्रण बनाए रखा था। इसलिए फ्रांस के राजा प्रोटेस्टेंटवाद की ओर आकर्षित नहीं हुए। लुई XI ने सामन्तों का दमन करने के लिए मध्यमवर्ग का इस्तेमान किया। उसने मध्यमवर्ग के कई सदस्यों को प्रमुख प्रशासकीय पदों और समितियों में नियुक्त किया। दूसरी ओर उसने सड़क, बंदरगाह और जहाजों के निर्माण में तथा उद्योगों के विकास में सरकारी संरक्षण प्रदान किया। अब फ्रांस यूरोप की राजनीति में प्रधान भूमिका निभाने के लिए सक्षम हो गया था।

स्पेन

शब्द के सही अर्थ में स्पेन कोई राज्य नहीं था। कई स्पेनी राज्य एैरागों और कैस्टील के दो राज्यों से जुड़ गए थे। प्रायद्वीप के भूमध्यसागरीय तट पर स्थित ऐरागों का अधिकार बेल्परीक द्वीपसमूह, सानिया, सिमली और नेपल्स पर था। 1452 ई. के बाद कैस्टील को नव-अन्वेषित अमेरिकी प्रदेश मिल गए थे। 1469 ई. में ऐरागों के फार्डेनेंड और कैस्टील के इसाबेला के विवाह के कारण इन दोनों राज्यों का विलय हो गया। लेकिन यह विलय केवल व्यक्तिगत था, क्योंकि दोनों राज्य दो राजाओं को मानते थे और उनकी राजनीतिक, न्यायिक और प्रशासनिक संस्थाएँ समान नहीं थी। स्पेनी राष्ट्रीय भावना नाम की तो कोई चीज ही नहीं थी। उत्तरी एैरागों की कैटलन लोकभाषा, कैस्टीलयन स्पेनी भाषा से – बिल्कुल भिन्न थी। पूरे स्पेन में अगर कोई एक समान भावना थी तो वह थी स्पेनी कैथोलिक चर्च में जुड़े होने की भावना मूरों (मुसलमानों) के विरुद्ध स्पेनवासियों ने एक होकर संघर्ष किया था। अगर किसी एक संस्था की सत्ता और उसके अधिकारियों की समान पहुँच पूरे स्पेन में थी, तो वह था ‘इनक्यूजिशन’ नामक चर्च अदालत स्पेन का चर्च काफी सशक्त अवस्था में था। 1500 ई. के तुरंत पहले कार्डिनल जिम्मेंस ने स्पेनी चर्च को उन बुराइयों और अकर्मण्यता से मुक्त किया था जिसके कारण बाकी यूरोप के चर्च आक्रांत थे। 1452 ई. में दक्षिणी स्पेन के ग्रेनाडा प्रांत को मुसलमानों से जीतकर स्पेन में मिलाया गया इस विजय ने स्पेनी क्षेत्रों के विजातीय रूप को मजबूत किया।

पुर्तगाल

सोलहवीं शताब्दी में पुर्तगाल एक अत्यन्त सम्पन्न और क्रियाशील राज्य था। पुर्तगाल का उदय इतिहास का मात्र एक संयोग ही लगता है। इसका उद्भव ग्यारहवीं शताब्दी में ही ढूंढा जा सकता है जब लियो के राजा ने बरगेण्डी के काउण्ट हेनरी को ओपोर्टो के अगल-बगल की जमींदारी मूरों के विरुद्ध लड़ने के बदले भेंट-स्वरूप दी थी। काउण्ट हेनरी और उसके उत्तराधिकारियों ने न केवल स्पेनी अधिपतियों से अपनी स्वतंत्रता प्राप्त की, बल्कि मूरों को दक्षिण की ओर भगाकर एक विस्तृत पुर्तगाल राज्य की स्थापना भी की। इस बीच स्पेनी भाषा से भिन्न एक राष्ट्रीय भाषा के रूप में पुर्तगाली भाषा का उदय हो रहा था।

इटली में पुनर्जागरण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

एक तरफ शक्तिशाली स्पेन से घिरे रहने के कारण पुर्तगाल ने समुद्र की ओर ध्यान दिया। पन्द्रहवीं शताब्दी में राजकुमार हेनरी, डियाज और वास्को डी गामा जैसे खोजकर्ताओं ने उत्तमाशा अन्तरिप से भारत तक पुर्तगाल के झंडे को लहराया और एक विशाल साम्राज्य की आधारशिला रखा। 1493 ई. के पेपॅल लाइन ऑफ डिमारकेशन (Papal Line of Demarcation) और स्पेन के साथ टोर्डेसिलाज की सन्धि (Treaty of Tordesillas) द्वारा पुर्तगाल को उत्तमाशा अनतरिप के पूरब के व्यापार का एकाधिकार प्राप्त हुआ। पुर्तकाल के कई योग्य सौदागरों और प्रशासकों ने पूर्वी साम्राज्य में जाकर काफी नाम और धन कमाया।

स्पेन की तरह पुर्तगाल ने भी यहूदियों, मुसलमानों और प्रोटेस्टेंटों पर अत्याचार किया और उन्हें देश से निष्कासित किया और स्पेन की तरह ही सोलहवीं शताब्दी के बाद पुर्तगाल का भी तेजी से पतन हुआ।

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