योग साधना का नैतिक महत्व क्या हैं? व्याख्या कीजिए।

योग साधना का नैतिक महत्व

योग साधना से इन्द्रिय निग्रह की क्रिया होती है, जिससे व्यक्ति अपनी इन्द्रियों पर आवश्यक नियन्त्रण रखने में सक्षम होता है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति व्यर्थ की बातों से दूर रहकर पथ भ्रष्ट होने से बचा रहता है। उसके मन में सदैव सात्विक विचार आते रहते हैं। उसकी आदते, स्वभाव, भोजन सम्बन्धी आदतें सभी सादगी से भर जाती हैं। इसके फलस्वरूप उसमें आचरण की सभ्यता आती है। उसके आचार-विचार उच्च कोटि के हो जाते हैं। उसके मन से नैतिकता के शत्रु, पाप, घृणा, ईर्ष्या, द्वेष, परपीड़ा, वैमनस्य आदि निकल जाते हैं। वह अपने संवेगों पर नियन्त्रण स्थापित करने में सन्तुलित होता है। वह सदैव ईमानदारी, सहिष्णुता, शान्तिप्रियता, दया, पारस्परिक प्रेम तथा सहयोग के नैतिक मूल्यों की ओर ध्यान देता रहता है।

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