विद्यालय में निर्देशन सेवाओं का क्या महत्व है ?

विद्यालय में निर्देशन सेवाओं का महत्व

आयोग ने निर्देशन सेवाओं के कार्य क्षेत्र के सम्बन्ध में व्याप्त संकुचित दृष्टिकोण की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करते हुए लिखा है कि विद्यार्थियों को शैक्षिक एवं व्यावसायिक चयन में सहायता देना ही निर्देशन का कार्य नहीं है। अपितु इन कार्यों के साथ-साथ समायोजन एवं विकास दोनों में सहायता देना निर्देशन का लक्ष्य होता है। निर्देशन छात्रों को घर एवं शिक्षा संस्थाओं की परिस्थितियों में सर्वोत्तम सम्भावित समायोजन प्राप्त करने में सहायता देने के साथ ही छात्र के व्यक्तित्व के सभी पक्षों के विकास में ही सहायता देता है।

इसीलिए निर्देशन को शिक्षा का एक अभिन्न अंग मानना चाहिए। इसको शिक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक सेवा तक ही सीमित नहीं करना चाहिए। निर्देशन सेवा केवल असामान्य बालकों के लिए ही नहीं होती, अपितु यह सभी विद्यार्थियों के लिए होनी चाहिए। शन निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है जो समय-समय पर व्यक्ति को निर्णय लेने एवं समायोजन करने में सहायता पहुँचाती है।

प्राथमिक शिक्षा में निर्देशन

कोठारी आयोग ने निर्देशन के महत्व को अनुभव करते हुए यह संस्तुति प्रस्तुत की, कि निर्देशन प्राथमिक विद्यालय की सबसे छोटी कक्षा से प्रारम्भ की जाय। निर्देशन का उपयोग बालकों के घर से विद्यालय में स्थानान्तरण को संतोषजनक बनाने, मूल शैक्षिक कौशलों को सीखने में अनुभव की जाने वाली कठिनाइयों के निदान करने, जिन छात्रों को विशेष शिक्षा की आवश्यकता हो उनको पहचानने, विद्यालय छोड़ने वाले छात्रों को विद्यालय में रहने में सहायता देने, छात्रों में श्रम संसार के प्रति अर्न्तदृष्टि पैदा करने एवं श्रम संसार के प्रति उचित दृष्टिकोण विकसित करने और प्रशिक्षण या अग्रिम शिक्षा की योजनाएँ बनाने में सहायता देने में किया जा सकता हैं आयोग ने इस बात पर दुःख प्रकट किया कि अब तक प्राथमिक स्तर पर निर्देशन के क्षेत्र में बहुत कम कार्य हुआ है।

माध्यमिक शिक्षा में निर्देशन

आयोग के अनुसार माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर निर्देशन का एक महत्वपूर्ण कार्य किशोर छात्रों की योग्यताओं एवं रूचियों के पहचानने एवं उनके विकास में सहायता देना है। इससे छात्रों को अपनी शक्तियों एवं सीमाओं को समझने एवं अपनी योग्यता के अनुरूप शैक्षिक कार्य करने में सहायता मिलेगी। निर्देशन शैक्षिक एवं व्यावसायिक अवसरों एवं उनकी उपेक्षाओं के सम्बन्ध में सूचना देने में सहायता करता है। निर्देशन के आधार पर छात्र सभी सम्बन्धित पक्षों पर विचार करके शैक्षिक एवं व्यावसायिक क्षेत्र में वास्तविक चुनाव करने और योजना तैयार करने में समर्थ होगे तथा विद्यालय एवं घर में व्यक्तिगत तथा सामाजिक समायोजन की समस्याओं का समाधान खोज सकेंगे। निर्देशन सेवाएँ प्रधानाध्यापक एवं अध्यापकों को अपने छात्रों को व्यक्तिगत रूप में समझने और छात्रों के लिए अधिक प्रभावशाली ढंग से सीखने की परिस्थितियों का निर्माण करने में सहायक होगी।

पिछड़ी जातियों के विकास की रणनीतियों की व्याख्या कीजिए।

आयोग ने इस लघु कार्यक्रम को प्रारम्भ करने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिये

  1. एक दूसरे से उपयुक्त दूरी पर प्रत्येक 10 विद्यालयों के लिए एक शैक्षिक परामर्शदाता की व्यवस्था करके सभी माध्यमिक विद्यालयों के लिए संक्षिप्त निर्देशन सेवा सुलभ कराई जाय और निर्देशन के सरल कार्य अध्यापकों को सौंप दिये जाएँ।
  2. वास्तविक निर्देशन सेवा के स्वरूप एवं उसकी उपलब्धियों का ज्ञान कराने के लिये प्रत्येक जिले में एक विद्यालय में विस्तृत निर्देशन सेवाओं की व्यवस्था की जाय। यह विद्यालय अन्य के लिए आदर्श रूप में कार्य करेंगा।

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