विद्याधर चन्देल की महानता के क्या कारण थे?

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विद्याधर चन्देल की महानता

विद्याधर चन्देल की महानता – विद्याधर चन्देल अपने पिता गण्ड की मृत्यु के बाद सन् 1017 ई. में सिंहासन पर बैठा। वह एक योग्य और पराक्रमी शासक था। उसने अपने शासन काल में चन्देल साम्राज्य को शिखर पर पहुँचा दिया। वह अपने समय का भारत का सबसे शक्तिशाली शासक था। मुस्लिम लेखकों ने उसे नंन्द और वीदा के नाम से सम्बोधित किया था।

परमारों पर विजय

अपने सामन्त राजा कीर्तिराज की सहायता से विद्याधर ने परमार नरेश भोजको पराजित कर उसे अपनी शक्ति का लोहा मनवाने पर मजबूर कर दिया था।

कलचुरियों पर विजय विद्याधर ने कलचुरि नरेश गांगेय देव को पराजित कर उसे अपनी अधीनता मानने पर बाध्य कर दिया था।

प्रतिहारों से संघर्ष

मुस्लिम लेखकों के विवरण से पता चलता है कि विद्याधर ने प्रतिहार शासक राज्यपाल का वध कर दिया था क्योंकि वह तुर्क विजेता महमूद की सेना से बिना लड़े ही मैदान छोड़ कर भाग गया था। राज्यपाल की हत्या के बाद पुत्र त्रिलोचन पाल विद्याधर की शरण में आ गया था।

महमूद से संघर्ष

विद्याधर चन्देल को अपने समय में मुस्लिम आक्रान्ता महमूद गजनवी का सामना करना पड़ा जिसमें विद्याधर ने प्रत्येक बार कूटनीतिक सूझ-बूझ और वीरता का परिचय दिया तथा सुल्तान को अपने उद्देश्य में सफल होने से रोका लेकिन अन्ततः विद्याधर चन्देल को अन्य समकालीन शासकों की तरह महमूद से सन्धि के लिए बाध्य होना पड़ा।

बाण के हर्ष चरित्र पर एक टिप्पणी लिखिए।

एक महान योद्धा होने के अतिरिक्त वह महान निर्माता भी था। उसने अपनी राजधानी खजुराहो में अनेक मन्दिरों का निर्माण कराया, जिसमें सबसे प्रसिद्ध मन्दिर कन्दरिया महादेव का मन्दिर है जो भारत के सबसे प्रसिद्ध मन्दिरों में से एक है। निः सन्देह विद्याधर चन्देल एक महान योद्धा और महान शासक था। उसकी मृत्यु 1029 ई. में हुई।

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