वंचित वर्ग की बालिकाओं की शिक्षा अधूरी रहने के कारण बताइये।

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वंचित वर्ग की बालिकाओं की शिक्षा अधूरी रहने के कारण – समाज के वंचित वर्ग के व्यक्ति अशिक्षित रह जाते हैं क्योंकि ये लोग शिक्षा के महत्त्व को नहीं समझते हैं। परिणाम यह है कि शिक्षा-प्रसार के लिये इनके क्षेत्र में समाज की ओर से सरकार को कोई विशेष सहयोग उपलब्ध नहीं होता है। प्रथम तो ये लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजना पसन्द नहीं करते हैं और यदि बच्चे जाते भी हैं तो इच्छानुसार उनका स्कूल जाना बन्द कर देते हैं।

इसके अतिरिक्त यदि माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षा दिलाना भी चाहते हैं तो निर्धनता के कारण वे ऐसा नहीं कर पाते हैं। अनुसूचित जाति के लोग भूमिहीन श्रमिक रहे हैं तथा समाज में अन्य वर्ग में गिने जाने वाले व्यक्तियों की निर्धनता के शिकार होते रहे हैं। निर्धनता के कारण परिवार के सभी सदस्यों को आवश्यक आवश्यकताओं की सन्तुष्टि के लिये एकजुट होकर कार्य. करना पड़ता है। परिणामतः आज भी माता-पिता अपने बच्चों को घर पर कार्य में सहायता करवाने के लिये रोक लेते हैं तथा कभी-कभी बीच में ही पढ़ने वाले बच्चों का स्कूल जाना बन्द करवा देते हैं। किन्हीं परिवारों में यदि अभिभावक स्कूल भेजने में सफल हो जाते हैं तो बच्चों को पढ़ाई में आवश्यक अध्ययन सामग्री उपलब्ध नहीं करा पाते, जिससे मजबूरी में उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़ देनी पड़ती है।

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अनुसूचित जातियों का एक बड़ा वर्ग गाँवों में निवास करता है। ग्रामों में आज भी स्कूलों का अभाव-सा है। पिछड़े इलाकों में तो कई गाँव के बीच एक स्कूल है। अभिभावक अधिक दूर स्कूल होने के कारण प्रायः अपने बच्चों को स्कूल भेजने से हिचकते हैं। किन्हीं स्थानों में विद्यालय भी होते हैं और अस्पृश्य जाति के लोग अपने बच्चों को विद्यालय भेजना शुरू कर देते हैं तो भी उचित सुविधाएँ व माहौल नहीं जुटा पाते हैं जिससे बच्चे कक्षा में असफल होने लगते हैं और अपव्यय होता है तथा बार-बार अवरोधन भी जिससे क्षुब्ध होकर ये अपने बच्चों को रोक लेते हैं और उनकी शिक्षा अधूरी रह जाती है।

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