तोरमाण कौन था? संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

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तोरमाण

तोरमाण के विषय में विद्वानों की विभिन्न विचारधाराएँ है। कुछ विद्वानों का विचार है कि तोरमाण हूण नहीं था बल्कि वह कुषाण था तथा उसने हूणों से मित्रता करके उनका नेतृत्व किया। इस विषय में डॉ. मजूमदार का मत है कि ‘यद्यपि इस बात का कोई भी निश्चित प्रमाण नहीं मिलता है कि तोरमाण हूण था, फिर भी परिस्थितिवश इन प्रमाणों से ऐसा प्रतीत होता है कि यह हम ही था। मुद्राओं से यह ज्ञात होता है कि तोरमाण विदेशी था तथा उसका हूणों से निकट का सम्बन्ध था। उसने अपने पराक्रम के बल पर गुप्त साम्राज्य के अनेक प्रान्तों पर विजय प्राप्त कर ली थी तथा मध्य भारत तक अपनी शक्ति बढ़ा ली थी।

कुवलय माला व कुर अभिलेख से यह पता चलता है कि. पंजाब पर भी उसने आक्रमण किया व उस पर अधिकार कर लिया तथा मालवा को भी अपने अधीन कर लिया था। एरण के अभिलेख से ज्ञात होता है कि गुप्त नरेश नरसिंह गुप्त बालादित्य के सेनापति भानुगुप्त का हूणों के साथ घोर युद्ध हुआ। ऐसा मत है कि तोरमाण की 515 ई. के लगभग मृत्यु हो। गई थी।

संघर्ष के सामाजिक कार्य, परिणाम का वर्णन कीजिए।

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