बहुपति विवाह के गुण-दोष बताइए।

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बहुपति विवाह के गुण –

(1) इस प्रथा की सहायता से परिवार की सीमित सम्पत्ति का और अधिक विभाजन नहीं होता। कृषि और पशुपालन में लगी जनजातियों के लिए यह प्रथा विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण सिद्ध हुई है। खस जनजाति का विश्वास है कि गढ़वाली समूह की बरबादी का एकमात्र कारण यह है कि बहुपति विवाह का परित्याग करने के कारण उनके यहां भूमि का विभाजन इतना अधिक बढ़ गया कि अधिकतर व्यक्तियों को गांव छोड़कर घरेलू नौकरियां करनी पड़ीं।

(2) जिन जनजातियों में बहुपति विवाह का प्रचलन है वहां सामाजिक संघर्षो की मात्रा भी कम पायी गयी है। इसका कारण यही है कि ऐसे समाजों में विवाह के द्वारा सामूहिकता की भावना में वृद्धि होती है।

(3) बहुपति विवाह के अन्तर्गत परिवार की आर्थिक क्रियाओं की क्षमता सदैव अधिक बनी रहती है।

(4) अपने संघर्षमय पर्यावरण में जनजातियां जीविका के साधन कठिनता से ही अर्जित कर पाती हैं। बहुपति विवाह ने जनसंख्या की अनावश्यक वृद्धि को नियन्त्रित रखकर जनजातियों के सामाजिक और आर्थिक सन्तुलन को बनाये रखने में सहायता दी है।

बहुपति विवाह के दोष-

(1) इस प्रथा के अन्तर्गत स्त्रियों की सामाजिक स्थिति में सुधार होने के बाद भी वे शारीरिक रूप से दुर्बल और अनेक बीमारियों की शिकार हो जाती हैं। जैविकीय नियमों के आधार पर तो यहां तक कहा जा सकता है कि यह स्थिति स्त्रियों को धीरे-धीरे बांझपन की ओर भी ले जाती है।

(2) इस प्रथा के अन्तर्गत स्त्रियों को यौन से सम्बन्धित विस्तृत स्वतन्त्रता मिल जाने के कारण यौनिक नैतिकता का स्तर बहुत गिर जाता हैं। यह स्थिति सामाजिक नियन्त्रण को बहुत कमजोर बना देती है।

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