सुमेरियन सभ्यता की सामाजिक व्यवस्था का वर्णन कीजिए।

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सुमेरियन सभ्यता की सामाजिक व्यवस्था – सुमेर की सभ्यता के बारे में विद्वान गवेषक आई० एम० दिकोनोफ लिखते हैं कि समाज में चार प्रधान वर्ग थे-पहला अभिजातवर्ग था जिसमें राजसत्ता से प्रत्यक्षतः सम्बन्धित लोग और प्रमुख पुरोहितगण शामिल थे। ये सार्वजनिक और व्यक्तिगत दोनों प्रकार की भूसम्पदा से लाभान्वित होते थे। वृद्ध जनों की परिषद इसी वर्ग की थी। दूसरा वर्ग स्वतन्त्र नागरिकों और सैनिकों का था।

इस वर्ग के लोग सामान्य सभा के सदस्य थे और इनके पास सामुदायिक जमीन का पारिवारिक स्वामित्व था। तीसरा वर्ग अनुयायी जन का था जो सामान्यतया उच्चवर्ग पर आश्रित थे। मन्दिरों और शिल्प कार्य से सम्बन्धित छोटे लोग भी इसी श्रेणी में आते थे। चौथा वर्ग दासों और दासियों का था जो मन्दिरों तथा राजमहलों की जमीन पर श्रम करते थे और अन्य उद्योगों से भी जुड़े थे।

समुद्रगुप्त के आर्यावर्त अभियान का विवरण दीजिए।

सुमेरियन समाज में दासों के श्रम का शोषण किया जाता था। दासों में, दूसरे देशों के युद्धबन्दी और सुमेरवासी दोनों सम्मिलित थे। भयंकर अपराध, कर्ज और विवशता जैसे तथ्य दास प्रथा की वृद्धि में सहायक हो रहे थे। दास लोग अपने स्वामी की चल सम्पत्ति थे- पशुओं की तरह। दासों से अमानुषिक व्यवहार किया जाता था और भागने की कोशिश करने पर क्रूर दण्ड के लिये उनके चमड़े को (पहचान के लिये भी) दागा जाता था। धन की व्यवस्था करके वे दासता से मुक्त हो सकते थे, व्यापार करने की छूट थी और सक्षम हो सकने पर अपनी ‘मुक्ति’ खरीद सकते थे। यदि दास का विवाह स्वतन्त्र नागरिक से हो जाय तो उनके बच्चे दासता से आजाद हो जाते थे।

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