शिक्षा के स्वरूप का वर्णन कीजिए।

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शिक्षा के स्वरूप- शिक्षा के स्वरूप निम्नलिखित हैं

(1) सामान्य तथा विशिष्ट शिक्षा सामान्य ज्ञान के उद्देश्य से प्रदान की जाने वाली शिक्षा सामान्य शिक्षा है। विशिष्ट ज्ञान से सम्बन्धित शिक्षा जैसे-चिकित्सा, कानून आदि विशिष्ट शिक्षा है। (2) वैयक्तिक एवं सामूहिक शिक्षा- अकेले व्यक्ति को दी जाने वाली शिक्षा वयैक्तिक शिक्षा तथा कई व्यक्तियों को सामूहिक रूप से दी जाने वाली शिक्षा सामूहिक शिक्षा है।

(3) नकारात्मक एवं सकारात्मक शिक्षा- पूर्व निश्चित उद्देश्य के अनुरूप प्रदान की जाने वाली शिक्षा सकारात्मक या निश्चयात्मक शिक्षा कहलाती है तथा इसके विपरीत बिना किसी पूर्वनिश्चित उद्देश्य के दी जाने वाली शिक्षा नकारात्मक या निषेधात्मक शिक्षा कहलाती है।

कलचुरि कौन थे? प्रारम्भिक कलचुरि शासकों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

(4) औपचारिक एवं अनौपचारिक शिक्षा- शिक्षा के औपचारिक साधन विभिन्न शिक्षण संस्थाएँ हैं। अनौपचारिक रूप में शिक्षा परिवार, पड़ोस, गोत्र, संगठनों आदि के द्वारा दी जाती है। आदिम समाजों में शिक्षा का अनौपचारिक रूप प्रचलित है तथा वर्तमान में औपचारिक रूप से शिक्षा प्रदान की जाती है।

(5) प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष शिक्षा शिक्षक द्वारा प्रत्यक्ष रूप से ज्ञान प्रदान करना प्रत्यक्ष शिक्षा कहलाती है। जब सीखने वाला अनुकरण करके ज्ञान प्राप्त करता है तो यह अप्रत्यक्ष शिक्षा कहलाती है।

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