सर्वोच्च न्यायालय का कार्यकाल वर्णन कीजिए ।

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सर्वोच्च न्यायालय का कार्यकाल – सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष है। यद्यपि संयुक्त राज्य अमरीका के संविधान की भांति भारतीय संविधान में आजीवन कार्यकाल की व्यवस्था नहीं की गयी है, फिर भी वर्तमान व्यवस्था व्यवहारतः वैसी ही है, क्योंकि भारत में औसत आयु को देखते हुए 65 वर्ष की आयु बहुत होती है। इसके अतिरिक्त हमारे संविधान के अनुच्छेद 128 में किसी सेवानिवृत्त को नियुक्त करने की भी विशेष व्यवस्था की गयी है। इस अवस्था के पूर्व वह स्वयं त्याग पत्र दे सकता है।

इसके सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उसके पद से केवल प्रमाणित दुर्व्यवहार या अक्षमता के आधार पर ही हटाया जा सकता है। इस ‘प्रकार के महाभियोग की कार्यविधि निश्चित करने का अधिकार संसद को प्राप्त है। कार्यविधि चाहे जो भी हो, लेकिन संसद के दोनों सदनों को अलग-अलग अपने सदस्यों की संख्या के बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई मत से प्रस्ताव पास करना होगा और यह प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेजा जायेगा।

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इसके बाद राष्ट्रपति उस न्यायाधीशको पदच्युति का आदेश जारी करेगा। इस सम्बन्ध में यह आवश्यक है कि न्यायाधीशों के विरुद्ध महाभियोग का प्रस्ताव एक ही सत्र में स्वीकार होना चाहिए और न्यायाधीश को अपने पक्ष के समर्थन तथा उसकी पैरवी का पूरा अवसर प्रदान किया जायगा।

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