संयुक्त परिवार को परिभाषित कीजिए।

संयुक्त परिवार प्राचीन काल से ही भारतीय सामाजिक संरचना का एक महत्वपूर्ण अंग रहा है। वर्तमान समय में इसका महत्व समाप्त होता जा रहा है, लेकिन लोगों में अब भी यह पारिवारिक स्वरूप का आदर्श है।

श्रीमती इरावती कर्वे ने लिखा है, “एक संयुक्त परिवार उन लोगों का समूह है, जो साधारणतः एक ही भवन में रहते हैं, जो एक ही रसोई में बना हुआ भोजन करते हैं, जो संपत्ति के सम्मिलित स्वामी होते हैं, जो सामान्य पूजा में भाग लेते हैं और जो किसी-न-किसी प्रकार एक-दूसरे के रक्त सम्बन्धी हैं।”

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प्रो० आई० पी० देसाई ने संयुक्त परिवार को परिभाषित करते हुए कहा है, “हम उस गृह को संयुक्त परिवार कहते हैं, जिसमें एकाकी परिवार से अधिक पीढ़ियों (तीन या अधिक) के सदस्य रहते हो और जिसके सदस्य एक-दूसरे से संपत्ति, आय और पारस्परिक अधिकारों तथा कर्त्तव्यों द्वारा सम्बद्ध हों।”

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