संविधानवाद और संविधान में क्या अन्तर है?

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संविधानवाद और संविधान में अन्तर

1. परिभाषा की दृष्टि से परिभाषा की दृष्टि से संविधान और संविधानवाद में अन्तर है। संविधानवाद एक विचारधारा का प्रतीक है। दूसरी ओर संविधान एक संगठन का प्रतीक। संविधानवाद के अन्तर्गत किसी राष्ट्र के मूल्य, विश्वास और राजनीतिक आदर्श सन्निहित रहते हैं, जबकि संविधान उन सिद्धान्तों का संकलन है, जिनके अनुसार सरकार की शक्तियों तथा शाषितों के अधिकारों के बीच सम्बन्धों का समायोजन किया जाता है।

2. उत्पत्ति की दृष्टि से संविधानवाद विकास का परिणाम रहा है, जबकि कुछ अपवादों को छोड़कर संविधान साधारण निर्मित होते हैं। संविधानवाद का विकास स्वचलित ढंग से होता रहता है। जबकि संविधान में समय तथा आवश्यकतानुसार संशोधन लाए जाते हैं।

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3. प्रकृति की दृष्टि से संविधान तथा संविधानवाद की प्रकृति में भी अन्तर पाया जाता है। संविधानवाद में राजनीतिक समाज के लक्ष्यों और उद्देश्यों का उल्लेख रहता है। संविधान इन लक्ष्यों और उद्देश्यों तक पहुंचने की सुव्यवस्था है।

4. क्षेत्र की दृष्टि से क्षेत्र की दृष्टि से भी संविधान और संविधानवाद में अन्तर पाया जाता है। संविधानवाद एक अभूतपूर्व धारणा है, जबकि संविधान एक अपवर्तक या एकमात्र धारणा है।

5. औचित्य या वैधता की दृष्टि से औचित्य या वैधता के सन्दर्भ में संविधान और संविधानवाद के बीच अन्तर देखा जाता है। संविधानवाद में दिए गए लक्ष्यों और आदर्शो के औचित्य आधार कोई न कोई विचारधारा है। संविधान वैधता विधि या कानून पर आधृत है।

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