संस्कृति तथा सभ्यता मे अन्तर स्पष्ट कीजिए।

संस्कृति तथा सभ्यता मे अन्तर

संस्कृति तथा सभ्यता मे अन्तर – कान्त ने संस्कृति और सभ्यता का अन्तर स्पष्ट करते हुए लिखा है कि “सभ्यता का सम्बन्ध व्यक्ति के अन्तर्गत अथवा विचारात्मक आधार से है, जबकि सभ्यता मनुष्य के बाहरी आचरण से सम्बन्धित है।” अनेक अन्य आधारों पर मैकाइवर ने भी संस्कृति तथा सभ्यता के के बीच पाए जाने वाले अन्तरों का उल्लेख किया है

(1) सभ्यता की माप हो सकती है, संस्कृति की नहीं

सभ्यता के विभिन्न तत्वों की कुशलता के आधार पर माप की जा सकती है। उदाहरण के लिए, कोई भी व्यक्ति सरलता से यह बता सकता है कि एक हवाई जहाज मोटर की तुलना में कितना अधिक तेज चलता है और इसलिए यह उससे कितना अधिक अच्छा है। संस्कृति के विषय में इस तरह की कोई माप नहीं की जा सकती। कोई वैज्ञानिक अथवा कलाकार एक व्यक्ति की दृष्टि में बहुत श्रेष्ठ हो सकता है जबकि दूसरा व्यक्ति उससे घृणा भी कर सकता है। वास्तव में, संस्कृति के तत्वों का सम्बन्ध व्यक्तिगत आस्था और सामान्य विश्वासों से है जिन्हें सार्वभौमिक रूप से अच्छा या बुरा नहीं कहा जा सकता।

(2) सभ्यता प्रगति की दिशा में बढ़ती है, संस्कृति नहीं

सभ्यता सदैव ही प्रगति की दिशा में आगे की ओर बढ़ती है। उदाहरण के लिए, बैलगाड़ी के बाद रेल और रेलों के बाद वायुयान तथा इसके पश्चात् अन्तरिक्ष यानों का विकास हुआ। संस्कृति के विकास का कोई निश्चित क्रम नहीं होता। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति यह नहीं कह सकता है कि आज की कविता और नाटक कालीदास और भास के साहित्य से श्रेष्ठ हैं। सॉरोकिन ने यह स्पष्ट किया कि संस्कृति में होने वाला परिवर्तन उतार-चढ़ाव के क्रम के रूप में देखने को मिलता है।

( 3 ) सभ्यता को ग्रहण करना सरल है, संस्कृति को नहीं

किसी विशेष स्थान की सभ्यता की शक्ति सरलतापूर्वक ग्रहण कर सकता है। उदाहरण के लिए, एक अशिक्षित व्यक्ति भी धन की सहायता से तरह-तरह की मशीनों, कार और सूट का उपयोग कर सकता है, वायुयान में यात्रा करके बहुत सभ्य होने का दावा कर सकता है तथा किसी भी देश के आविष्कारों का लाभ उठा सकता है। इसके विपरीत, संस्कृति को बहुत धीरे-धीरे और प्रयत्न करने के बाद ही सीखा जा सकता है। इसके बाद भी जब एक व्यक्ति अपने से भिन्न संस्कृति की विशेषताओं को ग्रहण करने का प्रयत्न करता है तब उसकी अपनी संस्कृति भी उसके व्यवहारों को कुछ-न-कुछ सीमा तक अवश्य प्रभावित करती रहती है।

(4) सभ्यता साधन है, जबकि संस्कृति एक साध्य

साध्य का अर्थ हमारे लक्ष्यों से होता है, जबकि इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के ढंग को ही हम उनका साधन कहते है। वास्तव में, संस्कृति इसलिए एक साध्य है कि इनके अनुसार अपने जीवन को ढालना ही हमारा लक्ष्य होता है। सभ्यता एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा हम इस लक्ष्य तक पहुँचने का प्रयत्न करते हैं। उदाहरण के लिए, मूर्ति-कला, अथवा वास्तु कला संस्कृति के अंग हैं। इन्हें सीखने के लिए हम जिन उपकरणों तथा वस्तुओं का उपयोग करते हैं, वह सभ्यता से सम्बन्धित हैं। स्पष्ट हैं कि विभिन्न प्रकार के उपकरणों और वस्तुओं से ही मूर्ति-कला अथवा वास्तुकला में कुशलता प्राप्त की जा सकती है।

( 5 ) सभ्यता का सम्बन्ध अनुकरण से हैं, जबकि संस्कृति का मानवीय चेतना से

सभ्यता के तत्वों को सीखने के लिए व्यक्ति द्वारा विशेष प्रयत्न करना आवश्यक नहीं होता है। हम अमेरिका, रूस और इटली में बनी मशीनों को सामान्य रूप से समझकर भी उनका उपयोग कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए न तो अधिक बुद्धि की आवश्यकता होती हैं और न ही हमें अपने विचारों और मनोवृत्तियों में परिवर्तन करना होता है। केवल अनुकरण के द्वारा सभ्यता के तत्वों को अपनाया जा सकता है। दूसरी ओर, संस्कृति इस अर्थ में मानवीय चेतना से सम्बन्धित है कि इसे केवल उन्हीं व्यक्तियों के द्वारा ग्रहण किया जा सकता है जिनकी मानसिकता उसके अनुकूल हो। उदाहरण के लिए, एक विशेष जनजाति हिन्दू धर्म को तब तक नहीं अपन सकती जब तक उसकी मनोवृत्तियाँ हिन्दू धर्म के अनुकूल नहीं बन जाएँ। इसी तरह हम एक चित्रकार के पेंटिंग की तब तक सराहना नहीं कर सकते जब तक हमें स्वयं भी चित्रकारी का कुछ ज्ञान न हो।

( 6 ) सभ्यता का प्रसार तेजी से होता है, लेकिन संस्कृति के प्रसार के लिए निकट सम्पर्क आवश्यक है-

सभ्यता के तत्वों को सरलता और शीघ्रता से फैलाया जा सकत है। जब किसी देश में कोई आविष्कार होता है तो दूसरे देशों में भी उसका जल्दी ही प्रसार हो जाता है। दूसरी ओर, एक संस्कृति का किसी दूसरे क्षेत्र में तभी प्रसार होता है जब उस क्षेत्र के लोग अपने से भिन्न संस्कृति के निकट सम्पर्क में आते रहें। एक-दूसरे से भिन्न संस्कृतियों वाले समूहों के निकट सम्पर्क में आने से वे एक-दूसरे से प्रभावित होते हैं और धीरे-धीरे उनकी सांस्कृतिक विशेषताओं को ग्रहण करने लगते हैं।

संस्कृति को परिभाषित कीजिए। भौतिक एवं अभौतिक संस्कृति में अंतर बताइए।

(7) सभ्यता वैकल्पिक है, जबकि संस्कृति एक सम्पूर्णता है-

किसी भी व्यक्ति के लिए अपनी सभ्यता से सम्बन्धित सभी तत्वों और पदार्थों को ग्रहण करना आवश्यक नहीं होता। हम अपने साधनों, आवश्यकता और रुचि के अनुसार कुछ वस्तुओं को ग्रहण कर सकते हैं और कुछ को छोड़ सकते हैं। दूसरी ओर, व्यक्ति जिस संस्कृति में रहता है, उसके सभी नियमों और विश्वासों के अनुसार उसे व्यवहार करना आवश्यक होता है। इस दृष्टिकोण से संस्कृति को सदैव एक सम्पूर्णता के रूप में ग्रहण किया जाता है।

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