समाज के लिए सामाजिक स्तरीकरण आवश्यक क्यों है?

0
33

समाज के लिए सामाजिक स्तरीकरण – सामाजिक स्तरीकरण एक सार्वभौमिक प्रक्रिया के रूप में समस्त समाजों में विद्यमान रहता है। प्राचीन समाजों में शासक और शासित अथवा मालिक और कृषक तथा दास के रूप में स्तरीकरण की प्रक्रिया की झलक मिलती है। भारत में जातिप्रथा स्तरीकरण का मुख्य आधार है। जो कि आज बढ़ती हुई सामाजिक जटिलता एवं परिस्थितियों में परिवर्तन के कारण क्रमशः वर्ग का रूप लेती जा रही है।

प्रत्येक समाज का एक निश्चित उद्देश्य होता है। एक तरफ वह व्यक्तियों में विभिन्न स्थितियों को प्राप्त करने की इच्छा करता है और दूसरी ओर उत्तरदायित्व निर्वाह करने वाले व्यक्तियों में अपने कर्तव्यों को सुचारू रूप से निर्वाह करने की इच्छा पैदा करता है। समाज में ऐसे पद होते हैं जिस पर कार्य करने के लिए विशेष प्रतिभा, शैक्षणिक योग्यता एवं ट्रेनिंग की आवश्यकता होती है।

भारतीय समाज के दार्शनिक आधार की विवेचना कीजिए।

समाज सदैव इस बात का प्रयास करता है कि अधिक ऊँचे पदों पर अधिक योग्य व्यक्ति पदासीन हों और निम्न पदों पर साधारण व्यक्ति तथा इन पर कार्य करने वाले व्यक्तियों को समाज सदैव विभिन्न रूपों में पुरस्कृत करता है। चूँकि विभिन्न पदों के लाभों और अधिकारों में असमानता होना स्वाभाविक है इसलिए समाज में स्तरीकरण का होना भी स्वाभाविक है।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here