सल्तनत काल में स्त्रियों की क्या दशा थी?

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सल्तनत काल में स्त्रियों की दशा – सल्तनत काल में मुस्लिम समाज में पर्दा प्रथा थी जिसका दृढ़ता से पालन किया जाता था। इस काल में आधुनिक काल की भाँति स्वियों के बाहर अकेले जाने या घूमने किसे की मनाही थी। उनको नगर से बाहर संतों की दरगाहों की यात्रा के लिए भी न जाने दिया जाता था। फिरोज तुगलक ने लिखा है कि उसने स्त्रियों का संतों की कब्रों पर जाना इसलिए बंद किया क्योंकि अनेक चरित्रहीन लफंगे भी वहां जाया करते थे। इस आदेश का उल्लंघन करने वाली स्त्रियों को घोर दण्ड दिया जाता था। एक प्रकार से मुस्लिम स्त्रियों को हिन्दू स्त्रियों की अपेक्षा कुछ विशेष सुविधायें सल्तनत काल में मुस्लिम समाज में पर्दा प्रथा थी जिसका दृढ़ता से पालन किया जाता था।

गृहस्थ आश्रम का समाजशास्त्रीय महत्व बताइए।

इस काल में आधुनिक काल की भाँति स्वियों के बाहर अकेले जाने या घूमने किसे की मनाही थी। उनको नगर से बाहर संतों की दरगाहों की यात्रा के लिए भी न जाने दिया जाता था। फिरोज तुगलक ने लिखा है कि उसने स्त्रियों का संतों की कब्रों पर जाना इसलिए बंद किया क्योंकि अनेक चरित्रहीन लफंगे भी वहां जाया करते थे। इस आदेश का उल्लंघन करने वाली स्त्रियों को घोर दण्ड दिया जाता था। एक प्रकार से मुस्लिम स्त्रियों को हिन्दू स्त्रियों की अपेक्षा कुछ विशेष सुविधायें

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