रोजगार विश्लेषण का अर्थ एवं परिभाषा लिखिए।

रोजगार विश्लेषण का अर्थ एवं परिभाषा

रोजगार विश्लेषण का अर्थ विभिन्न व्यवसायों के लिए कुशल व्यक्तियों के चयन हेतु प्रमाणिक प्रवणता परीक्षण का निर्माण किया जाता है। इनके नियोजन के सोपान में रोजगार विश्लेषण किया जाता है। यह प्रवणता परीक्षण निर्माण एवं व्यवसाय निर्देशन प्रक्रिया हेतु एक वैज्ञानिक प्रविधि हैं इसके दो मुख्य पक्ष हैं

  1. (रोजगार की कार्य प्रणाली की आवश्यकताओं तथा दशाओं का विश्लेषण करना।
  2. रोजगार हेतु कार्यकर्त्ताओं में अपेक्षिक योग्यताएँ, क्षमताओं एवं कौशलों का विश्लेषण करना।

परिभाषा :- रोजगार विश्लेषण की अनेक परिभाषाएं हैं उनमें से कुछ को यहाँ पर दिया गया है जो निम्नवत है

(1 ) ब्लूम के अनुसार, “रोजगार सम्बन्धी विभिन्न पक्षों का शुद्ध रूप में अध्ययन किया जाता है। इसके अन्तर्गत कर्तव्यों, भूमिकाओं तथा कार्य करने की परिस्थिति का ही विश्लेषण नहीं किया जाता है अपितु कर्मचारी की अपेक्षित योग्यताओं एवं क्षमताओं का विश्लेषण करते हैं।”

(2) जे०डी० है केटके अनुसार, “रोजगार विश्लेषण द्वारा विशिष्ट रोजगार सम्बन्धी आवश्यक तत्वों का निर्धारण किया जाता है और उसके सफल सम्पादन के लिए कर्मचारी की योग्यताओं एवं क्षमताओं का विशेष महत्व होता है।”

(3) टैड तथा केटकाफ के अनुसार- “रोजगार विश्लेषण का वैज्ञानिक प्रक्रिया कहा है जिसमें रोजगार सम्बन्धी सभी तथ्यों के सम्बन्ध विवरण तैयार किया जाता है जो रोजगार की कार्य-प्रणाली की पाठ्यवस्तु और उसे प्रभावित करने वाले कारकों पर भी विचार किया जाता है।”

रोजगार विश्लेषण की विशेषताएं

उपरोक्त परिभाषाओं में रोजगार विश्लेषण की विशेषताओं को प्रकट किया है जो निम्नलिखित हैं

  1. विशिष्ट रोजगार सम्बन्धी आवश्यक तत्वों का निर्धारण करना।
  2. रोजगार के कर्मचारियों के कर्तव्यों भूमिकाओं तथा कार्य परिस्थित का विश्लेषण करना।
  3. रोजगार सम्पादन की परिस्थिति में निहित कार्य प्रणाली तथा सम्बन्धित पाठ्यवस्तु का विश्लेषण करना।
  4. रोजगार की कार्य प्रणाली को प्रभावित करने वाले कारकों पर विचार करना।
  5. रोजगार के सफल सम्पादन हेतु कर्मचारियों की अपेक्षित योग्यताओं क्षमताओं एवं कौशलों का विश्लेषण करना।

इन परिभाषाओं ने मुख्य रूप से तीन पक्षों को महत्व दिया है। इस प्रकार रोजगार -विश्लेषण के तीन पक्ष निम्नांक्ति है।

  1. रोजगार सम्पादन की कार्य प्रणाली तथा परिस्थिति,
  2. कर्मचारियों की अपेक्षित योग्यताओं एवं क्षमताएं
  3. रोजगार की कार्य प्रणाली को प्रभावित करने वाले कारक।

रोजगार विश्लेषण की आवश्यकता

रोजगार विश्लेषण की आवश्यकता निम्नांकित कारणों से होती है

  1. रोजगार विश्लेषण से व्यवसाय के मूलभूत तत्वों को पहिचानने, जिनका व्यक्ति को उसमें करना पड़ता है।
  2. व्यक्ति को कुशल सम्पादन हेतु अपेक्षित योग्यताओं एवं क्षमताओं की पहिचान होती है।
  3. किसी रोजगार हेतु चयन प्रणाली के लिए प्रवणता परीक्षण का निर्माण किया जाता है।
  4. व्यवसाय निर्देशन में रोजगार विश्लेषण के आधार पर कुशल तथा सक्षम व्यक्तियों का चयन किया जा सकता है।
  5. व्यवसाय के चयन हेतु व्यक्ति को वैज्ञानिक निर्देशन दिया जाता है।

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रोजगार विश्लेषण के पक्ष

किसी रोजगार या व्यवसाय को कुशलता करने हेतु अनेक क्रियाएं करनी होती है। उन सभी क्रियाओं को चार मुख्य पक्षों में वर्गीकृत किया जाता है

  1. बौद्धिक कार्य (Mental Activities)
  2. शारीरिक कार्य (Physical Activities)
  3. सामाजिक कार्य (Social Activities)
  4. भावात्मक कार्य (Emotional Activities)

इन्हीं चार प्रकार की क्रियाओं के आधार पर रोजगार विश्लेषण के मुख्य चार पक्ष होते हैं अथवा किसी रोजगार की क्रियाओं को कुशलता से करने हेतु चार प्रकार की योग्यता तथा क्षमताएं आवश्यक होती है।

  1. बौद्धिक योग्यता (Mental Adilities)
  2. सामाजिक क्षमता (Social Efficiency)
  3. शारीरिक क्षमता (Physical Effciency)
  4. भावात्मक सन्तुलन (Emotical Adjustment)

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