रामगुप्त की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डालिए।

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रामगुप्त की ऐतिहासिकता से सम्बन्धित घटना का सर्वप्रथम उल्लेख विशाखदत्त के देवी चन्द्रगुप्त नाटक में हुआ है। यह नाटक अपने मूल रूप में तो प्राप्त नहीं होता किन्तु इसके कुछ अंश उद्धरण के रूप में नाट्य दर्पण में मिलते हैं जिसकी रचना रामचन्द्र एवं गुप्तचन्द्र ने की थी। इन उद्धरणों से ज्ञात होता है कि रामगुप्त कायर और अपने कुल के लिए कलंक था। शकों ने उसे परास्त कर उसकी पत्नी ध्रुव देवी की मांग की। रामगुप्त शकराज को सन्तुष्ट करने के लिए। ध्रुव देवी को देने के लिए तैयार हो गया, परन्तु चन्द्रगुप्त ने छदम वेश में जाकर शकपति को मार डाला।

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राजशेखर की काव्यमीमांशा में भी इस घटना का उल्लेख किया गया है जहाँ रामगुप्त को शर्मगुप्त एवं शकाधिपति को खशाधिपति कहा गया है। इसी प्रकार देवी चन्द्रगुप्त की कथा से साम्य रखती हुई एक अन्य कथा ग्यारहवीं शताब्दी की अरबी भाषा की पुस्तक मुजमलउत तवारीख में भी प्राप्त होती है।

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