राज्यसभा के पदाधिकारी।(office bearers of Rajya Sabha)

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राज्यसभा के पदाधिकारी – पदाधिकारी राज्यसभा की कार्यवाही के संचालन हेतु इसके दो पदाधिकारी होते हैं। इसमें एक सभापति और एक उपसभापति होता है। भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है, जिसका कार्यकाल 5 वर्ष होता है। उपसभापति का निर्वाचन राज्यसभा के सदस्य अपने सदस्यों में से करते हैं जो 6 वर्ष के लिए निर्वाचित किया जाता है। सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति सभापति के स्थान पर कार्य करता है।

लोकसभा अध्यक्ष की तरह संसद की कार्यवाहियों का संचालन राज्यसभा का सभापति भी करता है। वह सदस्यों को अनुशासन में रखते हुए उन्हें वाद-विवाद का अवसर प्रदान करता है। प्रस्तावों और विधेयकों पर मतदान करता है तथा आवश्यकता पड़ने पर अपना निर्णायक मत देता है। अतः सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति और उपसभापति की अनुपस्थिति में राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त राज्यसभा का सदस्य सभा में सभापतित्व करता है।

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राज्यसभा के सभापति एवं उपसभापति के विरुद्ध अविश्वास या अयोग्यता का प्रस्ताव पारित करके उसको पद से हटाया जा सकता है। सभापति को हटाने के लिए यदि राज्यसभा उपस्थित सदस्यों के बहुमत से प्रस्ताव पास कर दे और लोकसभा भी इस प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दे दे तो सभापति को उसके पद से हटाया जा सकता है। राज्यसभा में ऐसा प्रस्ताव रखने से पहले सभापति को 14 दिन का नोटिस देना आवश्यक है। उपसभापति को हटाने के प्रस्ताव को लोकसभा की सहमति नहीं ली जा सकती है। केवल राज्यसभा के उपस्थित सदस्यों के बहुमत से यदि उसके विरुद्ध अविश्व का प्रस्ताव पास कर दिया जाता है तो उपसभापति को अपना पद छोड़ना पड़ता है।

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