राधाकृष्णन कमीशन का मूल्यांकन कीजिए।

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राधाकृष्णन कमीशन का मूल्यांकन

राधाकृष्णन कमीशन का मूल्यांकन – विश्वविद्यालय शिक्षा के इतिहास में राधाकृष्णन आयोग का एक प्रमुख स्थान रहा है ने विश्वविद्यालयों की प्रत्येक समस्या पर गम्भीरता से विचार कर उनकी समस्याओं के सम सुझाव दिया है। ग्रामों में उच्च शिक्षा की आवश्यकता की ओर जनता एवं सरकार का ध्यान आकर्षित करने का श्रेय इस कमीशन को प्राप्त है। इसकी सिफारिश को स्वीकार करके सरक *1954 में ग्रामीण उच्चतर शिक्षा समिति को ग्रामीण शिक्षा का उत्तरदायित्व सौंप दिया। अ – अध्यापकों के महत्व को स्वीकार करते हुए उनके वेतन के सम्बन्ध में जो सिफरिशें प्रस्तुत कीं वे पूर्णत: व्य • और समय के अनुकूल थीं।

इसी प्रकार परीक्षाओं के क्षेत्र में दिये गये सुझाव भी विशेष महत्व र व्यावसायिक शिक्षा के साथ-साथ मानव विषयों को भी महत्व देकर इस आयोग ने सराहनीय कार्य फिर भी इस आयोग की सिफारिशों को पूर्णत: दोष मुक्त नहीं कहा जा सकता। आयोग ने ललित कल कोई ध्यान नहीं दिया।

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इसी प्रकार धार्मिक शिक्षा और स्त्री शिक्षा पर भी इस आयोग के विचार अधिक नहीं थे। जहाँ तक ग्रामीण विश्वविद्यालयों का प्रश्न है आयोग ने इन विश्वविद्यालयों के संगठन के बारे उल्लेख नहीं किया। इन सब दोषों के होते हुए भी राधाकृष्णन आयोग ने विश्वविद्यालय स्तर की शि सुधारने के लिए जो सुझाव दिया है वे सभी अपना विशेष महत्व रखते हैं।

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