फ्रोबेल की खेल विधि पर प्रकाश डालिये।

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फ्रोबेल की खेल विधि

फ्रोबेल महोदय के अनुसार “खेल मानव की अत्यंत शुद्ध एवं आध्यात्मिक क्रिया है। अतः यह मानव को प्रसन्नता, स्वतंत्रता, धैर्य, आन्तरिक तथा बाह्य विश्राम एवं शांति प्रदान करता है। इसके अन्तर्गत वे सभी बातें सम्मिलित हैं, जो अच्छी हैं।” अतः उन्होंने इस बात पर उ बल दिया कि बालकों की आत्मक्रिया की अभिव्यक्ति भी खेल के ही द्वारा होनी चाहिये जिससे बालकों का शारीरिक विकास के साथ-साथ नैतिक विकास भी होता रहे। यही कारण है कि किण्डरगार्टेन विधि में उपहारों से लेकर व्यापारों तक सभी क्रियाओं को बालकों से खेलते ही खेलते कराया जाता है। ध्यान देने की बात है कि किण्डरगार्टेन विधि के अन्तर्गत विभिन्न खेलों के कुछ आवश्यक नियम होते हैं तथा सभी खेलों को शिक्षक के उचित पथ-प्रदर्शन में सिखाया जाता है।

भारतवर्ष में स्त्री-शिक्षा के विकास का वर्णन कीजिए।

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