परवर्ती गुप्तशासक महासेनगुप्त पर टिप्पणी लिखिए।

0
48

गुप्त शासक परवर्ती गुप्तशासक महासेनगुप्त एक शक्तिशाली शासक प्रतीत होता है। इसने मगध पर अधिकार कर मौखरियों की सत्ता वहीं से समाप्त कर दी। मौखरियों के बढ़ते प्रभाव से अपनी सुरक्षा के लिए उसने पुण्यभूतियों से विवाह सम्बन्ध स्थापित किया। उसने अपनी बहन महासेनगुप्त का विवाह आदित्यवर्धन के साथ सम्पन्न किया। इससे उसकी स्थिति कुछ सुदृढ़ हुई जिसका लाभ उठाकर महासेनगुप्त ने कामरूप के राजा सुस्थितवर्मन को पराजित किया एवं अपने प्रभाव का विस्तार किया। इसके बावजूद महासेनगुप्त की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। मौखरि तो उत्तर गुप्त शासकों को परेशान किए ही थे।

कौटिल्य और मेगास्थनीज के विषय में आप क्या जानते हैं?

चालुक्यों के राजा कीर्तियमों ने सम्भवतः महासेन गुप्त के समय में मगध पर आक्रमण किया। तिब्बती राजा श्रागसनासगपो जिसकी तिथि 581-600 ई. है ने मध्य भारत पर आक्रमण किया। इसका प्रभाव भी महासेनगुप्त पर पड़ा। बंगाल के जयनाग का भी मगध पर दयाव बढ़ रहा था। ऐसी स्थिति में महासेनगुप्त मगध छोड़कर मालवा चला गया। उररी के साथ पूर्वी मालवा के उत्तर-गुप्तों की शाखा आरम्भ हुई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here