परमार शासन व्यवस्था के बारे में आप क्या जानते हैं?

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परमार शासन व्यवस्था

परमार शासन व्यवस्था में राजा सर्वोच्च अधिकारी होता था। राजपूत कालीन अन्य साम्राज्यों की तरह परमार वंश की शासन व्यवस्था में भी सामन्ती शासन का प्रभुत्व था। राजा सामन्तों की सहायता से ही शासन करता था। सामन्तों के पास अपने न्यायालय तथा अपनी मन्त्रिपरिषद होती थी परन्तु अपने लेखों में वे सम्राट का उल्लेख करते थे। राजा की मन्त्रिपरिषद का महत्व परमार वंश में कम हो गया था। प्रबन्धचिन्तामणि के अनुसार परमार नरेश मुंज ने अपने प्रधान मन्त्री रूद्रादित्य की सलाह के विपरीत चालुक्य नरेश तैलप से युद्ध किया। राज्य की आय का मुख्य श्रोत भूमिकर था, जो तीसरे से 12वें भाग तक लिया जाता था। ग्राम पंचायते केन्द्रीय शासन से प्रायः स्वतन्त्र होकर कार्य करती थी। प्रबन्धचिन्तामणि के विवरण से स्पष्ट होता है कि परमार राजाओं का शासन जनता के कल्याण के लिए था।

मिहिरभोज प्रतिहार वंश का महानतम् शासक था।” इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

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