पंचवर्षीय योजनाओं में स्त्री-शिक्षा प्रयासों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

पंचवर्षीय योजनाओं में स्त्री-शिक्षा

प्रथम योजना – इस योजना के अंतर्गत सियों को पुरुषों के समान शिक्षा प्राप्त करने की सब सुविधाएँ दी गयी हैं। चूंकि भारत की अधिकांश थियों को किशोरावस्था में ही अपनी शिक्षा स्थगित करनी पड़ती है, इसलिए उन्हें प्राइवेट रूप में उच्च परीक्षाएँ उत्तीर्ण करने के अवसर दिये गये। यह भी कहा गया कि माध्यमिक एवं विश्विविद्यालय शिक्षा इस प्रकार की हो कि वह स्त्रियों को किसी गृहोद्योग या हस्तशिल्प की शिक्षा दे सके।

द्वितीय योजना – इस योजना में बालिकाओं की शिक्षा के विस्तार एवं अध्यापिकाओं के प्रशिक्षण हेतु प्रारंभ की जाने वाली योजनाओं में प्रगति हुई। केंद्रीय सरकार ने अध्यापिकाओं को प्रशिक्षण प्राप्त करने की दृष्टि से वृत्ति देकर, बालिकाओं की उपस्थिति के लिए छात्रवृत्तियों देकर एवं अध्यापिकाओं के लिए बिना किराये के क्वार्टरों का निर्माण करके, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र में सहायता दी। सरकार को स्त्री-शिक्षा से संबंधित समस्याओं पर परामर्श देने के लिए ‘राष्ट्रीय महिला शिक्षा परिषद्’ का निर्माण किया गया।

तृतीय योजना- केंद्रीय सरकार के परामर्शानुसार प्रत्येक राज्य के शिक्षा विभाग में एक उप निदेशक अथवा संयुक्त निदेशक नियुक्त किया गया, जिसे बालिकाओं एवं महिलाओं की शिक्षा से। संबंधित कार्यक्रमों का निर्माण करने एवं उनको कार्यान्वित करने का भार सौंपा गया। बालिकाओं एवं प्रौढ़ महिलाओं की शिक्षा के लिए एक विशेष कार्यक्रम तैयार किया गया। इस दिशा में भी प्रयास किया गया कि बालिकाओं की हॉकी, क्रिकेट, फुटबॉल, बॉलीबाल आदि आधुनिक खेलों में रुचि उत्पन्न हो। शिक्षा प्राप्त करने वाले बालकों एवं बालिकाओं की शिक्षा के बीच की दूरी को कम करने की चेष्टा की गयी।

चतुर्थ योजना- प्रथम तीन योजनाओं के पूर्ण होने के बाद भी बालकों व बालिकाओं की शिक्षा में पर्याप्त दूरी बनी रही। विद्यालय स्तर पर इस दूरी को कम करने के लिए चतुर्थ योजना में निम्नलिखित उपाय किये गये ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने की अध्यापिकाओं के लिए विशेष भत्ता, अध्यापिकाओं के लिए क्वार्टरों की व्यवस्था, विद्यालय माताओं (School Mothers) की नियुक्ति, बालिकाओं के लिए छात्रावासों का निर्माण तथा अध्यापिकाओं के अभाव की पूर्ति करने के लिए वयस्क महिलाओं के लाभार्थ संक्षिप्त पाठ्यक्रमों का संचालन।

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पंचम योजना – इस योजना में इस तथ्य पर बल दिया गया कि बालिकाओं और बालकों की शिक्षा में पर्याप्त दूरी है तथा इस दूरी का मुख्य कारण है-अध्यापिकाओं का अभाव। पाँचवीं योजना में इस अभाव की पूर्ति के लिए बालिकाओं को इस शर्त पर छात्रवृत्तियाँ दी जायेंगी कि वे शिक्षा समाप्त करने के बाद शिक्षण व्यवसाय को ग्रहण करें। इसके अतिरिक्त, कम शिक्षित स्त्रियों एवं बालिकाओं के लिए संक्षिप्त एवं पत्राचार पाठ्यक्रमों की व्यवस्था पर भी बल दिया गया।

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