मुस्लिम विवाह में तलाक पर टिप्पणी लिखिए।

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मुसलमानों में तलाक

मुस्लिम विवाह में तलाक पर विच्छेद को हो तलाक कहा जाता है। वे दोनों तब तक नहीं मिल सकते जब तक कि उनका फिर से निकाह न हो जाए। मुस्लिम कानून के अनुसार कोई भी व्यक्ति, जो वयस्क और स्वस्थ मस्तिष्क वाला है, बिना कारण स्पष्ट किए ही अपनी पत्नी को तलाक दे सकता है। इस प्रकार के मौखिक तलाक के निम्नलिखित तीन प्रकार प्रचलित हैं

(i) तलाक-एक अहसन

इसमें पत्नी के तुहर अर्थात् मासिक धर्म के समय एक बार तलाक की घोषणा की जाती है और ‘इद्दत’ तीन तुहरों की अवधि में पति और पत्नी के मध्य सहवास नहीं हो सकता है।

(ii) तलाक-ए-हसन-

इसमें तुहर के वक्त ‘इद्दत’ में तलाक की घोषणा की जाती है और इन तुहरों में सहवास की अनुमति नहीं दी जाती है।

मुस्लिम विवाह का क्या अर्थ है? मुस्लिम विवाह के प्रकार और विशेषताओं की विवेचना कीजिए।

(iii) तलाक-उल-बिद्दत-

इनमें किसी एक तुहर के समय पति एक वाक्य में तलाक की घोषणा करता है। घोषणा के समय पत्नी अथवा किसी साक्षी का होना आवश्यक है। यह तलाक तुरन्त लागू हो जाता है। पैगम्बर साहब के अनुसार यह तलाक उचित नहीं है।

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