मन्त्रिपरिषद और लोकसभा में सम्बन्ध ।

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मन्त्रिपरिषद और लोकसभा में सम्बन्ध – मन्त्रिपरिषद अपने कार्यों के लिए संसद के प्रति उत्तरदायी होती है। व्यवहार में यह – उत्तरदायित्व संसद के निचले सदन लोकसभा के प्रति होता है मन्त्रिपरिषद् के सदस्यों के लिए संसद का सदस्य होना आवश्यक होता है। यदि कोई व्यक्ति मंत्री बनते समय संसद का सदस्य नहीं है, तो उसे 6 महीने के अन्दर संसद के दोनों में से किसी एक सदन का सदस्य बनना आवश्यक है, अन्यथा 6 महीने के पश्चात् वह मंत्री अपने पद पर कार्य नहीं कर सकता।

संसद तथा मन्त्रिपरिषद् के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध होते हैं। मन्त्रिपरिषद् के सदस्य सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं। किसी एक मंत्री के विरुद्ध अविश्वास का प्रस्ताव पास हो जाने की स्थिति में सम्पूर्ण मन्त्रिपरिषद् को त्यागपत्र देना पड़ता है मन्त्रिपरिषद् तभी तक कार्य कर सकती है, जब तक उसे लोकसभा का विश्वास प्राप्त हो।

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अविश्वास का प्रस्ताव पास कर लोकसभा कभी भी मन्त्रिपरिषद् को समाप्त कर सकती है। इस प्रकार प्रतीत यह होता है कि लोकसभा मन्त्रिपरिषद् के ऊपर पूर्ण नियन्त्रण रखती है, परन्तु व्यवहार में ऐसा है नहीं। मन्त्रिपरिषद् का जब तक लोकसभा में पूर्ण बहुमत है, तब तक वह लोकसभा से कुछ भी करवाने में समर्थ होती है। दूसरी ओर मन्त्रिपरिषद् को भी यह अधिकार प्राप्त है कि वह राष्ट्रपति से सिफारिश कर कभी भी लोकसभा को भंग करवा सकती है।

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