महमूद गजनवी के विषय में आप क्या जानते हैं?

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महमूद गजनवी

महमूद गजनवी गजनी के शासक सुबुक्तगीन का पुत्र था। वह सन् 998 ई. में अपने पिता की मृत्यु के बाद गजनी का शासक बना। वह अत्यन्त वीर, साहसी और महत्वकांक्षी शासक था। सन् 1000 ई. में महमूद ने खलीफा से स्वतंत्र सत्ता की मान्यता प्राप्त कर ली और यामिनुद्दौला और अमीनुल्लाह की उपाधियाँ प्राप्त कर ली। अब वह एक स्वतंत्र सुल्तान था। उसने स्वतंत्र सुल्तान बनने के बाद यह प्रतिज्ञा की कि वह भारत पर प्रतिवर्ष आक्रमण करेगा। विद्वानों के अनुसार महमूद ने भारत पर बारह अथवा सत्रह बार आक्रमण किया। महमूद ने प्रथम आक्रमण सन् 1000ई. में किया। 1001 ई. के अपने दूसरे आक्रमण पर उसने हिन्दुसाही राजा जयपाल को पराजित किया।

इसके पश्चात भी महमूद भारत पर लगातार आक्रमण करता रहा और भारत पर उसका अन्तिम आक्रमण 1027ई. में जाटों पर हुआ। इन सभी युद्धों में महमूद को सफलता प्राप्त हुई और उसे अपार धन की पशप्ति हुई। महमूद का भारत का सबसे प्रसिद्ध आक्रमण काठियावाड़ स्थित सोमनाथ के मन्दिर पर था। यह आक्रमण 1024 25 ई. में किया गया था। इस युद्ध में सोमनाथ के मन्दिर से महमूद गजनवी को अपार धन सम्पति प्राप्त हुई। सन् 1030ई. में उसकी मृत्यु हो गयी।

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महमूद के भारत आक्रमण का उद्देश्य धन की पशप्ति था उसने भारत से प्राप्त धन से गजनी को अत्यन्त समृद्ध बनाया। वह भारत पर अपना साम्राज्य स्थापित नहीं करना चाहता था। वह और न ही वह भारत में इस्लाम का प्रचार ही करना चाहता था क्योंकि उसके बनवाये कोई भी प्रचार केन्द्र अथवा मजिस्द के प्रमाण भारत में प्राप्त नहीं होते हैं।

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