लैंगिक समानता के विकास में मीडिया की भूमिका का विवेचन कीजिये।

लैंगिक समानता के विकास मे मीडिया को जनसंचार के रूप में माना जाता है अर्थात् जनसंचार के लिये जो साधन प्रयुक्त किये जाते हैं, यह मीडिया कहलाते हैं। मीडिया से हमें देश-दुनिया से जुड़ी जानकारियों तो मिलती ही है साथ ही इसके माध्यम से हमें सामाजिक कुरीतियों और इन कुरीतियों को दूर करने के उपायों के बारे में भी ज्ञान होता है। टीवी, रेडियो, समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, विभिन्न पुस्तकें और इण्टरनेट एवं कम्प्यूटर प्रमुख मीडिया साधन हैं जो लंगिक समानता के विकास में भी अपना योगदान प्रस्तुत करते हैं। अतः लैंगिक समानता के विकास में मीडिया की भूमिका को निम्नलिखित बिन्दुओं के द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है।

  1. समाचार-पत्रों में आये दिन महिला उत्पीड़न और लिंग विभेद जैसी खबरें छपती हैं, उनकी आलोचना छपती है और भविष्य में ऐसी वृत्तियों रुक सके, ऐसे उपाय बताये जाते हैं।
  2. मीडिया द्वारा समाज में व्याप्त विसंगतियों की ओर जनसाधरण का ध्यान आकृष्ट किया जाता है। लैंगिक असमानता भी समाज की एक विसंगति है जिस पर मीडिया में व्यापक रूप से चर्चा की जाती है। रेडियो, टेलीविजन, समाचार-पत्रों आदि माध्यमों के द्वारा जनता को लैंगिक विषमता के कुप्रभावों और लैंगिक समानता के लाभों से अवगत कराया जाता है जिससे लोग जागरुक बनते हैं और लैंगिक समानता के विकास के प्रयास करने लगते हैं।
  3. आधुनिक युग में इण्टरनेट एक सशक्त मीडिया साधन के रूप में उभरकर सामने आया है। इसके माध्यम से भी प्रभावी रूप में लैंगिक समानता के विकास के लिये सार्थक सहयोग प्राप्त किया जा सकता है। इण्टरनेट के माध्यम से एक व्यक्ति के विचारों को समस्त विश्व में सम्प्रेषित किया जा सकता है। अतः लैंगिक समानता से जुड़े विचारों का आदान-प्रदान करने के लिये और इस सन्दर्भ में किये गये प्रयासों की जानकारी के लिये इण्टरनेट एक सशक्त साधन है।
  4. टीवी, रेडियो पर प्रसारित किये जाने वाले कार्यक्रम भी लैंगिक समानता को ध्यान में रखकर बनाये जाते हैं।
  5. मीडिया द्वारा भ्रूण लिंग जाँच और कन्या भ्रूण हत्या का भी कड़ा विरोध किया जाता है और लैंगिक समानता के विकास के लिये विभिन्न प्रकार के जागरूकता सम्बन्धी कार्यक्रम प्रसारित किये जाते हैं।
  6. मीडिया के माध्यम से सरकार द्वारा चलायी गयी उन योजनाओं के बारे में जानकारी मिलती है जो लैंगिक समानता के विकास से सम्बन्धित है।

शासक के रूप में पृथ्वीराज तृतीय का मूल्यांकन कीजिए।

उपरोक्त वर्णन से स्पष्ट होता है कि शैक्षिक दृष्टि से मनोरंजन के साथ मीडिया समाजिक परिवर्तन का एक अपूर्व साधन है। इसके माध्यम से मनोरंजनात्मक वातावरण में कठिन है कठिन शान को बड़ी सरलता से, शीघ्रता से तथा स्थायी रूप से दिया जा सकता है। मीडिया के माध्यम से दूरस्थ परिस्थितियों को भी उसी स्वरूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। मूर्त विचार वस्तु स्थिति एवं घटना आदि से सम्बन्धित विषयवस्तु की जानकारी के लिये मीडिया अत्यन्त उपयोगी है और इसीलिये लैंगिक समानता के विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

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