क्या शिक्षा को समवर्ती सूची में रखना उचित है? इसके पक्ष में तर्क दीजिए।

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क्या शिक्षा को समवर्ती

3 जनवरी, 1977 तक शिक्षा राज्य का विषय थी, लेकिन 42 वें संविधान संशोधन के द्वारा शिक्षा को समवर्ती सूची में लाया गया। शिक्षा को राज्य सूची की प्रविष्टि-11 से निकालकर समवर्ती सूची में रख दिया गया। (समवर्ती सूची 25 को बढ़ा दिया गया)। संशोधन से पहले प्रविष्टि 25 में कहा गया था- “श्रमिकों का व्यावसायिक और तकनीकी प्रशिक्षण (Vocational and technical training of Labour) और संशोधन के बाद Education, including technical education, medical education, and universities, subject, Subject to the provision of entries 63,64,65,and 66 of list, vocational and technical training of labour. इस प्रकार शिक्षा विषय को समवर्ती सूची में लाकर शिक्षा विकास का उत्तरदायित्व संघ और राज्य दोनों का है। शिक्षा को समवर्ती सूची में लाने के पक्ष और विपक्ष दोनों में तर्क दिये जाते हैं।

पक्ष में तर्क (Arguments in Favour)

  1. यदि निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा को साकार रूप देना है, तो केन्द्र को शक्तिशाली बनाया जाना चाहिये। राज्य सरकारें इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल नहीं हुई हैं।
  2. आर्थिक और सामाजिक विकास कार्यक्रमों का प्रभावकारी नियोजन और क्रियान्वयन करना है तो केन्द्र को अधिक शक्तिशाली होना पड़ेगा।
  3. लोगों की आम धारणा है कि यदि एक समाजवादी राष्ट्र का निर्माण करना है, तो यह तभी सम्भव है जब केन्द्र राज्यों को मार्गदर्शन दे।
  4. यदि देश में सभी के लिये एक राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली की व्यवस्था होनी चाहिये तो केन्द्र को शिक्षा की देखरेख के लिये उत्तरदायित्व का वहन करना होगा। कुछ लोगों की यह मान्यता है कि राज्य स्तर पर शिक्षा का नेतृत्व स्थानीय और साम्प्रदायिक हितों के कारण शिक्षा के विकास के लिये उपयुक्त नहीं बन पाता।
  5. केन्द्र के पास संसाधनों की मात्रा अधिक होती है और वह शिक्षा पर अधिक खर्च कर सकता है।
  6. केन्द्र शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रीय एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।

अस्पृश्यता क्या है?

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