खजुराहो के मन्दिरों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

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चन्देल राजाओं के शासनकाल के स्थापत्य कला का प्रतीक आज भी खजुराहो (छतरपुर) मध्य-प्रदेश में विद्यमान है, जो न सिर्फ मध्यकालीन भारत अपितु सम्पूर्ण भारतीय इतिहास में अपना विशिष्ट स्थान रखती है। खजुराहो में लगभग तीन हजार मन्दिर आज भी विद्यमान है। शैव वैष्णव और जैन धर्मों से सम्बन्धित इन मन्दिरों का निर्माण 950 ई. से 1050 ई. के बीच हुआ था। अधिकांश मन्दिरों का निर्माण मंच पर हुआ है, जो आयताकार नागर शैली में बने हुए है। मन्दिर के मुख्य देवता की मूर्ति गर्भगृह में प्रतिष्ठित है। गर्भगृह के आगे अन्तराल है और उसके आगे महामण्डप है। महामण्डप के आगे अर्धमण्डप और मण्डल है। गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणापथ का निर्माण किया गया है।

पुष्यभूति के विषय में आप क्या जानते हो?

बहुसंख्यक छोटे-बड़े श्रृंगों से युक्त इन मन्दिरों में प्रवेश के लिए चार द्वारों का भी निर्माण किया गया है। श्रृंगों की क्रमबद्ध श्रृंखला के कारण मन्दिरों की आकृति पर्वत जैसी लगती है। खजुराहो के मन्दिरों की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि यहाँ पर शैव, वैष्णव और जैन धर्म तीयों के मन्दिरों की संख्या लगभग समान है। यद्यपि कोई भी बौद्ध मन्दिर प्राप्त नहीं हुआ है, परन्तु कुछ बौद्ध प्रतिमायें प्राप्त हुई है।

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