कनिष्क बौद्ध था, अपने विचार व्यक्त कीजिए।

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कनिष्क बौद्ध था – कुषाण वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक कनिष्क था। कनिष्क एक वीर योद्धा, साहसी विजेता और महत्वाकांक्षी सम्राट था। उसने एक विशाल साम्राज्य का निर्माण किया। कनिष्क को एक साम्राज्यवादी शासक और कुशल प्रशासक से अधिक बौद्ध धर्म के प्रचारक के में जाना है। कुछ साहित्यिक ग्रन्थों में कनिष्क को रक्त पिपासु और नर पिशाच बताया गया है। परन्तु बाद में जब उसने बौद्ध स्वीकार कर लिया तो पूर्ण अहिंसावादी हो गया। कनिष्क की अनेक मुद्राएँ प्राप्त हुई। है। उसकी प्रारम्भिक मुद्राओं में यूनानी देवता सूर्य और चन्द्रमा का चित्र मिलता है परन्तु बाद की मुद्राओं में महात्मा बुद्ध का चित्र मिलता है इससे भी सिद्ध होता है कि कनिष्क ने बाद में बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया था।

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लगभग सभी बौद्ध ग्रन्थ कनिष्क को बौद्ध मतावलम्बी मानते हैं। राजतरंगिणी के अनुसार भी कनिष्क बौद्ध था और उसने कश्मीर में बौद्ध धर्म का प्रचार किया था। कनिष्क का बौद्ध धर्म की ओर रूझान इस कार्य से भी प्रकट होता है कि उसके शासनकाल में कश्मीर के कुण्डलवन में चौथी बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ था। निःसन्देह कनिष्क बौद्ध धर्म का महान प्रचारक था जिसके कारण उसे द्वितीय अशोक कहा जाता है।

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