कला शिक्षा को स्पष्ट कीजिए।

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छात्रों के व्यक्तित्व के विकास के लिए पाठ्यचर्यागत क्रिया-कलाप के रूप में कला शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है। छात्रों में सौन्दर्यानुभूति उत्पन्न करना कला शिक्षा का उद्देश्य है। जिससे वे सौन्दर्य के प्रति रेखा, रंग, रूप गति और ध्वनि के सम्बन्ध में प्रतिक्रिया जाहिर करने योग्य बनें। कला का अध्ययन और सांस्कृतिक विरासत साथ-साथ चल सकते हैं और वे एक दूसरे के प्रति समझ और उनके प्रति सराहना या आलोचना करने की प्रवृत्ति को पुष्ट करेंगे। ललित कलाओं के क्षेत्र में प्राथमिक स्तर पर जो अनुभव छात्रों ने स्वस्थ और उत्पादक जीवन के लिए कला विषय के अन्तर्गत हासिल किए हैं, उनसे इस विषय के प्रति उनमें काफी उत्साह पैदा होगा। लोक और शास्त्रीय दोनों ही स्तरों पर कलाओं की विविधता के प्रति चेतना एवं रुचि उत्पन्न करने के लिए उच्च प्राथमिक स्तर पर पाठ्यचर्या में कला शिक्षण एक मुख्य उद्देश्य होगा जिससे कि शिक्षाथी कलासर्जक और उसके आनन्द को ग्रहण करने वाला दोनों ही बनें। कला शिक्षा सृजनात्मक अभिव्यक्ति के लिए सर्वाधिक सन्तोषप्रद माध्यम है जिसके शिक्षण का महत्व समाज के सर्वोत्तम हित में अत्यन्त आवश्यक है।

शिक्षा के सभी स्तरों पर, ललित कलाओं में भी संगीत का विशेष स्थान है। संगीत बच्चे को लोरियों के माध्यम से पालने में ही लुभाने लगता है और आगे चलकर उनके सम्पूर्ण जीवन पर छा जाता है। संगीत केवल जीवन की लय ही बच्चों को नहीं सिखाता बल्कि उनकी ललित भावनाओं, मूल्यों एवं मानक और आनन्दायी उच्चारण ध्वनियों की पहचान भी सिखाता है।

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कला शिक्षा कार्यक्रमों की लोक कलाओं, स्थानीय विशेष कलाओं और अन्य कला तत्वों से छात्रों को परिचित कराने पर ध्यान देना होगा ताकि वे सांस्कृतिक विरासत के प्रति चेतना और उसकी सराहना कर सकें।

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