कैथोलिक धर्म की पुनस्थापना के लिए क्या प्रयास किए गए ?

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कैथोलिक धर्म की पुनस्थापना – कैथोलिक धर्म के प्रधान धर्माधिकारी ‘पोप’ ने कैथोलिक धर्म के पुनरुद्धार के लिए 1562 ई. में ट्रेन्ट नामक स्थान पर एक सभा का आयोजन किया, जिसमें कैथोलिक धर्म के लिए नवीन नियमों को प्रतिपादित किया गया। ट्रेन्ट की सभा में निम्नलिखित मुख्य

उद्देश्यों को प्राप्त करने तथा उपदेशों को सफल बनाने का प्रयास किया गया

  1. कैथोलिक चर्च का प्रधान पोप है।
  2. चर्च को ही धर्म ग्रन्थों का अर्थ लगाने का अधिकार है।
  3. कैथोलिक के लिए लैटिन भाषा में एक नयी बाईबिल तैयार की जाए।

लिखित एवं निर्मित संविधान ।

समा में कुछ सुधारों की भी घोषणा की गयी, जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं :

  1. चर्च के पदों को बेचने पर प्रतिबन्ध लगाया गया।
  2. सभी विशप अपने अपने कर्तव्यों का पालन करें।
  3. पादरियों को उचित प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गयी।
  4. आवश्यकता अनुसार जनसाधारण की भाषा में उपदेशों का प्रचार कराया गया।

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