काका कालेलकर आयोग क्या है?

काका कालेलकर आयोग (1953) – भारत सरकार आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के उन्नयन के लिए कुछ विशिष्ट लोकोपकारिक कार्य करना चाहती थी। सन् 1951 में संसद में संविधान के अनुच्छेद 15 के संशोधन बहस के संदर्भ में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था, “हमारे सामाजिक जीवन में प्रविष्ट असीमित विभेदों को हम जड़ से समाप्त कर देना चाहते हैं-इन विभेदों को हम जाति व्यवस्था अथवा धार्मिक विभेद इत्यादि कह सकते हैं। इसके अतिरिक्त हमारे सामाजिक जीवन में आर्थिक विभेद भी है, जिसका हम अनुभव करते हैं और उसका समाधान करने का भी प्रयास करते हैं। किन्तु हमारी सामाजिक संरचना में यह विभेद बढ़ते ही जा रहे हैं।”

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इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अनुच्छेद 340 के संदर्भ में भारत के राष्ट्रपति ने कहा काका कालेलकर की अध्यक्षता में 29 जनवरी, सन् 1953 को ‘प्रथम पिछड़ा आयोग‘ की नियुक्ति की, जिसने अपना प्रतिवेदन 31 मार्च, 1955 को प्रस्तुत किया था।

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