जीन जैकस रूसो और सामाजिक समझौता।

0
34

जीन जैकस रूसो फ्रांस का दार्शनिक था। उसका सामाजिक समझौता सिद्धान्त बहुत प्रसिद्ध है। रूसो के अनुसार, मनुष्य का प्रारम्भिक जीवन बड़ा सुखमय था। परन्तु धीरे- धीरै व्यक्तिगत सम्पत्ति का उदय होने के कारण उसका जीवन कष्टकारी हो गया। जिसके कारण अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो गयी। रूसो के अनुसार समाज की इस अशान्त और संघर्षमय स्थिति को समाप्त करने के लिए जीवन को पुनः शान्त और सुखमय बनाने के “लिए सभी व्यक्ति मिलकर एक समझौता करते हैं। जिसके अनुसार प्रत्येक व्यक्ति अपने शरीर व सम्पत्ति को अन्य सबके साथ संयुक्त रूप से सामान्य इच्छा के निर्देशन में रखते हैं। तथा प्रत्येक व्यक्ति को सामूहिक रूप से समाज के अविभाज्य अंग के रूप में ग्रहण करते हैं। इस तरह रूसो बताता है कि मानव प्रकृतिक अवस्था को समाप्त करने हेतु जो समझौता करता है वह दो पक्षों के मध्य होता है। एक पक्ष उनके प्राकृतिक जीवन का है और दूसरा सामूहिक जीवन का। अतः वे व्यक्तिगत रूप से जो कुछ खोते हैं उसे समझौते के माध्यम से। पुनः प्राप्त कर लेते हैं।

तुगलक वंश के पतन में फिरोज तुगलक कहां तक उत्तरदायी था?

समझौता सिद्धान्त विशेषताएं

रूसों के समझौता सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ) निम्न हैं-

  1. रूसो के सामाजिक समझौता सिद्धान्त में समझौते व्यक्ति विशेष को नहीं अपितु सम्पूर्ण समाज को सौंपता है।
  2. रूसो के सामाजिक समझौता सिद्धान्त समझौते से सरकार की नहीं अपितु राजनीतिकसमाज या राज्य का निर्माण होता है।
  3. रूसो के सामाजिक समझौता सिद्धान्त में सम्प्रभु शक्ति सामान्य इच्छा में निहित है।जिसका प्रतिनिधित्व राजनीतिक समाज करता है।
  4. रूसो के सामाजिक समझौता सिद्धान्त में समझौते के बाद मनुष्य सामाजिक हित को मजत्व देने वाला एक नैतिक प्राणी बन जाता है।
  5. सामाजिक समझौता कोई एक घटना नहीं अपितु एक निरन्तर चलने वाली घटना है।
  6. रूसो के सामाजिक समझौता सिद्धान्त में समझौता के फलस्वरूप उत्पन्न समाज अथवा राज्य का स्वरूप सावयविक है।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here