जयचन्द और पृथ्वीराज तृतीय के सम्बन्धों पर प्रकाश डालिए।

0
42

जयचन्द और पृथ्वीराज तृतीय के सम्बन्ध – गहड़वाल नरेश जयचन्द विजयचन्द का पुत्र था। जयचन्द सन् 1170 ई. में शासक बना। पृथ्वीराज तृतीय और गहड़वाल नरेश जयचन्द राजनैतिक क्षेत्र में एक दूसरे के प्रतिस्पर्धी थे। जयचन्द की पृथ्वीराज से रात का उल्लेख चन्दा कृत ‘पृथ्वीराज रासों में किया गया है। पृथ्वीराज रासो की संयोगिता के स्वयंवर की कथा का वृतान्त पृथ्वीराज विजय, हम्मीर महाकाव्य और प्रबन्ध दन्तामणि जैसे ग्रन्थ में तो नहीं मिलता है, किन्तु सुनवरित आइने-ए-अकबरी में उपलब्ध है। जयचन्द ने पृथ्वीराज को नीचा दिखाने के लिए अपनी पुत्री संयोगिता के स्वयंवर में उसे निमन्त्रित नहीं किया। संयोगिता का स्वयंवर से अपहरण कर पृथ्वीराज तृतीय ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।

नन्द वंश के पतन पर प्रकाश डालिए।

जयचन्द ने इसे अपनी प्रतिष्ठा पर आघात समझा और पृथ्वीराज तृतीय से उसकी शत्रुता और भी बढ़ गयी हसन निजामी लिखता है। कि पृथ्वीराज की विस्तारवादी नीति का प्रबल विरोधी जयचन्द था, संयोगिता के अपहरण ने उसे उसका घोर शत्रु बना दिया और इसी शत्रुता में उसे पृथ्वीराज के विरुद्ध मुहम्मद गोरी का साथ देने पर मजबूर किया जिससे पृथ्वीराज का और बाद में जयचन्द का साम्राज्य मुहम्मद गोरी द्वारा जीत लिया गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here