जनरीति एवं लोकाचार में अन्तर बताइये?

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जनरीति एवं लोकाचार में अन्तर – वस्तुतः जनरीतियां अपेक्षाकृत स्थायी व्यवहार है जिनका पालन करना एक परिस्थिति में आवश्यक माना जाता है। जनरीति का अर्थ लोगों द्वारा अपनी इच्छाओं व आवश्यकता की पूर्ति के लिए अपनाये गये तरीको से लिया गया है। जनरीतियों का पालन मनुष्य अचेतन रूप से करता रहता है, इसका विकास स्वतः एवं मानव अनुभवों के आधार पर होता है। इनका निर्माण योजनाबद्ध तरीकों से नहीं होता, अतः वे अनियोजित होती हैं। जनरीतियां मानव की किसी न किसी आवश्यकता की पूर्ति अवश्य करती हैं, अतः आवश्यकताओं में परिवर्तन होने पर इनमें भी परिवर्तन होता रहता है। इस प्रकार जनरीतियों का उपयोगी पक्ष भी होता है। लोकाचार वे सामाजिक व्यवहार हैं जिनकी समूह द्वारा अपेक्षा की जाती है और जो नैतिकता की भावना पर आधारित होते हैं।

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लोकाचारों में समूह कल्याण की भावना निहित होती है। अतः उन्हें अधिक दृढ़तापूर्वक स्वीकृति प्रदान की जाती है। समूह द्वारा किसी लोकाचार की भावना के उल्लघंन को बहुत गम्भीर माना जाता है। लोकाचार का सम्बन्ध समूह की आधारभूत आवश्यकताओं से होता है। ये सामाजिक नियन्त्रण का एक अनौपचारिक साधन हैं। जनरीतियां ही आगे चलकर लोकाचार में परिवर्तित हो जाती हैं।

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