भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना सम्बन्धी मतों का उल्लेख कीजिए |

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“कांग्रेस की स्थापना भारत में एक ‘सुरक्षा कवच’ के रूप में ब्रिटिश शासन में हुई थी”? आप इस विचार से कहाँ तक सहमत हैं?इस प्रश्न का उत्तर आप सभी को नीचे विस्तार पूर्वक से बताया गया हैं आप सभी इसे अच्छे से तैयार कर लें। आप सभी की जानकारी के लिए हम बता दें की इस प्रकार के प्रश्न आप सभी के बी.ए. प्राथम वर्ष राजनीति शास्त्र (Political Science) द्वितीय प्रश्न पत्र से प्रश्न पूछे जाते हैं। जो छात्र, छात्राएं टीचर बनने से सम्बंधित परीक्षाओं की तयारी कर रही हैं या कर रहे हैं उन सभी के लिए यह प्रश्न अवश्य पढना चाहिए। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना सम्बन्धी मतों का उल्लेख

काँग्रेस का उद्भव : विभिन्न मत-

काँग्रेस के उद्गम के बारे में विभिन्न मत प्रस्तुत किये गये हैं। वस्तुत: काँग्रेस की स्थापना का मूल विचार कहाँ और कैसे उत्पन्न हुआ था, यह विवादास्पद विषय है। पट्ठाभितीतारमैया ने लिखा है, “यह एक रहस्य ही है कि किसके मन में पहले पहल अखिल भारतीय काँग्रेस का विचार आया।” इस सम्बन्ध में विभिन्न मत निम्नलिखित हैं। सुरक्षा नली (वाल्व) के रूप में कांग्रेस का मूल्यांकन

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना का वर्णन कीजिये

(1) सुरक्षा नली के रूप में-

लाला लाजपतराय और सर विलियम वेडरबर्न के अनुसार काँग्रेस की स्थापना ब्रिटिश साम्राज्य की रक्षा के लिये एक सुरक्षा-नली के रूप में की गई थी। अंग्रेजों के शोषण, अत्याचारों, विशेष रूप से लिटन के दमनात्मक कार्यों से भारतीयों में रोष बढ़ता जा रहा था। ह्यूम को गृह सचिव होने के कारण पुलिस की गुप्त रिपोर्टों को पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ था और उसे भारत के आन्तरिक, भूमिगत षड्यन्त्रों आदि के बारे में ज्ञान हो गया था, अतः ब्रिटिश साम्राज्य के लिए सुरक्षा साधन की आवश्यकता थी। श्याम का उद्देश्य एक राजभक्त राजनीतिक संगठन की स्थापना करना था, जिससे भारत के बुद्धिजीवियों को अराजकतापूर्ण कार्यों से अलग रखा जा सके। लाजपत राय का कहना था, “काँग्रेस की स्थापना का मुख्य उद्देश्य अंग्रेजी साम्राज्य को खतरे से बचाना था, भारत की स्वतन्त्रता के लिये प्रयास करना नहीं। ब्रिटिश साम्राज्य का हित प्रमुख था, भारत का गौण।” काँग्रेस की स्थापना तथा कार्यप्रणाली का विशेष अध्ययन सत्यपाल और प्रबोधचन्द्र ने किया है। उनके शोधों से भी लाला लाजपतराय के दृष्टिकोण की पुष्टि होती हैं उनका कहना है कि काँग्रेस की स्थापना ह्यूम ने अंग्रेजी राज्य की रक्षा के लिए की थी। जहाँ सरकार असफल हो गयी, ह्यूम ने मृदु शब्दों तथा सुखद वायदों का प्रयोग किया। हयूम का काँग्रेस की स्थापना में जो भी विचार रहा हो, फिर भी यह स्वीकार किया जायेगा कि उसने एक महान कार्य किया था। उसके कार्य से भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन को एक संगठित, अखिल भारतीय मंच प्राप्त हुआ। गोपालकृष्ण गोखले ने ह्यूम के कार्य का स्वागत करते हुए कहा था कि उस समय किसी भारतीय नेता का व्यक्तित्व इतना ऊँचा नहीं था कि वह इस कार्य को सम्पन्न कर सकता। अगर करने का प्रयास करता तो ब्रिटिश शासन उस होने नहीं देता। अत: ह्यूम के कार्य का महत्व यही है कि एक अंग्रेज तथा पूर्व अधिकारी होने के कारण वह काँग्रेस की स्थापना को सफलतापूर्वक कर सके।

(2) कल्याणकारी संस्था-

ऐनी बेसेन्ट ने काँग्रेस की स्थापना के लिये अपने थियोसोफिस्ट साथियों को श्रेय दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने भारत के कल्याण के लिए अखिल भारतीय संस्था की स्थापना का विचार बनाया।

(3) डफरिन का षड्यन्त्र-

काँग्रेस के प्रथम सभापति व्योमेशचन्द्र बनर्जी ने 1898 ई. में यह विचार प्रकट किया था कि काँग्रेस की स्थापना के पीछे वायसराय लार्ड डफरिन का पडड्यन्त्रकारी विचार था। उसने राम से कहा था कि सामाजिक संस्था के पीछे, जो ह्यूम का मूल विचार था, के स्थान पर राजनीतिक संस्था की स्थापना की जाये जो विपक्ष की भूमिका निभा सके।

(4) रूस का भय-

नन्दलाल चटर्जी ने 1950 ई. यह विचार व्यक्त किया है कि काँग्रेस की स्थापना रूस के भय के कारण की गयी थी। रूस ने 1884 ई. में मर्व पर तथा 1885 ई. पंजदेह पर अधिकार कर लिया था। इससे इंग्लैण्ड में भारतीय साम्राज्य के बारे में चिन्ता हुई। वायसराय डफरिन ने इस संकट के बारे में भारत मन्त्री को लिखा था।

(5) समर्थक मंच की प्राप्ति-

बी.एल. ग्रोवर का मत है कि काँग्रेस की स्थापना इसलिये की गई थी कि इस प्रकार की संस्था को मंच मिल सके, जहाँ उदारवादी भारतीय नेता रूस का विरोध तथा अंग्रेज समर्थक प्रचार कर सकें।

भारतीय राष्ट्रीयता के विकास के कारणों की विवेचना कीजिये

(6) भारत की राष्ट्रीय संस्था-

अधिकांश विद्वानों का मत है कि कांग्रेस की स्थापना भारत की राष्ट्रीय चेतना का स्वाभाविक विकास था। इन विद्वानों का यह भी मत है कि हयूम पर सुरक्षा नली का आरोप लगाना तथा उसे साम्राज्यवादी रक्षक के रूप में चित्रित करना उचित नहीं है। वह एक उदारवादी व्यक्ति था और भारतीयों के प्रति उसने आरम्भ से ही मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाया था। लाजपतराय ने भी स्वीकार किया था कि ह्यूम स्वतन्त्रता के पुजारी थे और उनका हृदय भारत की निर्धनता तथा दुर्दशा पर रोता था। इसलिये उन्होंने भारतीयों के हितार्थ एक राष्ट्रीय संगठन का सुझाव दिया था बल्कि भारतीयों को वैधानिक ढंग से संगठित करना चाहता था। वह चाहते थे कि जैसा उसने 1888 के काँग्रेस अधिवेशन में कहा था, भारतीय आन्दोलन ब्रिटेन के एन्टी कार्न लीग’ की तरह का आन्दोलन चलायें, जिससे स्वेच्छाकारी सरकार को भारतीयों की न्यायोचित मांगों को मानने के लिये बाध्य किया जा सके।

स्पष्ट है कि कांग्रेस की स्थापना के बारे में भिन्न-भिन्न मत व्यक्त किये गये है। यह निर्णय करना कठिन है कि काँग्रेस की स्थापना का वास्तविक कारण क्या था और इसकी स्थापना में मुख्य भूमिका किसकी थी लेकिन विपिनचन्द्र ने चाहे जितने तर्क दिये हो, ह्यूम का नाम सरलता से खारिज नहीं किया जा सकता। ह्यूम ने काँग्रेस की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। सम्भव है कि ह्यूम का उद्देश्य भारत और इंग्लैण्ड के मध्य घनिष्ठता स्थापित करना रहा हो।

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