इलाहाबाद स्तम्भ अभिलेख (प्रयाग प्रशिस्त) के विषय में आप क्या जानते हैं?

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इलाहाबाद स्तम्भ अभिलेख (प्रयाग प्रशस्ति) को समुद्रगुप्त के शासनकाल में उत्कीर्ण करवाया गया था। इस प्रशस्ति से समुन्द्रगुप्त के शासन काल के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। यह स्तम्म अभिलेख प्रारम्भ में कौशाम्बी में स्थित था, जिसे अकबर के शासनकाल में प्रयाग में स्थापित कर दिया गया था। इस अभिलेख में कोई तिथि नहीं दी गई है। डॉ. फ्लीट आदि विद्वानों का मत था कि यह समुद्रगुप्त की मृत्यु के पश्चात् लिखा गया था, परन्तु आधुनिक विद्वान इस मत को नहीं मानते हैं, क्योंकि इसमें समुद्रगुप्त के अश्वमेध यज्ञ का उल्लेख नहीं किया गया है। अतः यह अवश्य ही समुद्रगुप्त के दक्षिण में लौटने और अश्वमेध यज्ञ के पहले लिखा गया है। इस अभिलेख की निदि चाहे जो भी हो, परन्तु इसमें किन्चित मात्र भी सन्देह नहीं है कि गुप्तकालीन इतिहास की जानकारी में इस अभिलेख का विशेष महत्व है।

गुप्तों के उद्भव व मूल स्थान की विवेचना कीजिए।

इलाहाबाद स्तम्भ अभिलेख पूर्णतः ऐतिहासिक है। इस 38 पंक्तियों की प्रशस्ति की रचना हरिषेण ने की थी जिसे साम्राज्य में सन्धि विग्रहित का पद प्राप्त था। अभिलेख की भाषा शैली बड़ी उत्कृष्ठ है। इसका कुछ भाग पद्य में है और कुछ गद्य में है। इसमें समुद्रगुप्त के शासन काल का विशद वर्णन मिलता है।

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