हर्ष और भास्कर वर्मन की सन्धि की उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।

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हर्ष और भास्कर वर्मन की सन्धि की उपलब्धिय – वानेश्वर के सम्राट हर्ष और कामरूप के शासक भास्कर वर्मन की सन्धि से दोनों शासको को लाभ मिला। हर्ष को सर्वप्रथम उपलब्धि यह मिली की भास्कर वर्मन के साथ चिर कालिक सन्धि करने के कारण उसे उसकी बहन राज्यश्री प्राप्त हुई। कन्नौज राज्य पर भी उसने विजय प्राप्त कर ली। इसे सम्पन्न करने के लिए विशाल सेना लेकर हर्ष शत्रु की ओर बढ़ा और अपने प्रस्ताव क्रम में आसाम के राजा भास्कर वर्मन के साथ उसके दूत हंसवेग के द्वारा चिर कालिक सन्धि कर ली। हर्ष की सेना को पास पहुँचते देखकर शशांक ने लौट जाना ही उचित समझा और वह कन्नौज से पीछे पूर्व की ओर हटने लगा। हर्ष ने अपने राज्य की सीमाएं बढ़ाकर अपने राज्य की सेना में वृद्धि की इसी विशाल सैन्य शक्ति पर उसकी रक्षा निर्भर थी। कन्नौज की सभा में सम्मिलित होने के लिए गंगा के दक्षिण तट पर चलता हुआ कामरूप का राजा भास्कर वर्मन के साथ हर्ष 90 दिन में कन्नौज पहुँचा। वहां 18 देशों के नरेशों ने उसका स्वागत किया। प्रयाग के पंचवर्षीय अधिवेशन में भास्कर वर्मन तथा दक्षिण का राजा ध्रुव भट्ट भी सम्मिलित था। इस प्रकार हर्ष और भास्कर वर्मन दोनों को सन्धि से विशेष उपलब्धियाँ प्राप्त हुई।

शिक्षा नीति सम्बन्धी सरकारी प्रस्ताव 1913 में शिक्षा के विभिन्न पहलुओं में सुधार के सम्बन्ध में जो

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