हड़प्पा संस्कृति में मातृ देवी प्रतिमाओं पर एक टिप्पणी लिखिए।

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हड़प्पा संस्कृति में मातृ देवी – हड़प्पा सभ्यता के देवी देवताओं में मातृदेवी का स्थान सर्वश्रेष्ठ था। सिन्धु घाटी में बहुत अधिक संख्या में जो मिट्टी की मूर्तियाँ प्राप्त हुई हैं उन्हें मातृ देवी का ही प्रतिरूप माना गया है। इसी तरह की मूर्तियाँ दक्षिणी बलोचिस्तान की कुल्ली संस्कृति से और उत्तरी बलोचिस्तान की सोच घाटी से प्राप्त हुई हैं जो मूर्तियाँ सोच पाटी से प्राप्त हुई हैं, उनके सिर पर वस्त्र है और कुल्ली से प्राप्त मूर्तियों के गले में कई हार हैं। सम्पूर्ण पश्चिमी एशिया में मातृदेवी की मूर्तियाँ मिली हैं।

इस सम्बन्ध में विद्वानों का विचार है कि किसी समय में मातृदेवी की उपासना का क्षेत्र सिन्धु से नील नदी तक फैला हुआ था मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा की सभ्यता से प्रस्तर की मूर्तियाँ भी प्राप्त हुई है इनमें ग्यारह मूर्तियाँ मोहनजोदड़ो से तथा केवल दो मूर्तियाँ हड़प्पा से प्राप्त हुई हैं। ये सभी मूर्तियाँ नग्नावस्था में हैं। फिर भी ये तत्कालीन कला के श्रेष्ठ नमूने है। हड़प्पा के लोग देवी को अपना रक्षक समझते थे तथा लोगों का यह विश्वास था

तराइन के प्रथम युद्ध का वर्णन कीजिए।

कि मातृदेवी संकट के समय में कुछ बड़ी कुछ छोटी होती हैं खुदाई के दौरान मिली मूर्तियों कुछ बड़ी और कुछ छोटी अवस्था में है। हड़प्पा सभ्यता के लोग मातृदेवी के सामने भजन तथा कीर्तन करके मातृदेवी को प्रसन्न करने का प्रयास करते थे।

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