हड़प्पा सभ्यता की शासन व्यवस्था पर टिप्पणी लिखिए।

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हड़प्पा सभ्यता की शासन व्यवस्था – लगभग 20 लाख वर्ग किमी तक फैली सिन्धु सभ्यता 600 वर्षो तक निरन्तर कायम रही। इससे सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि यहाँ कोई न कोई उच्च केन्द्रीय राजनीतिक संगठन रहा होगा। समकालीन मिस्र और मेसोपोटामिया सभ्यता के विपरीत यहाँ किसी मन्दिर के अवशेष प्राप्त नहीं है। अतः मेसोपोटामिया की तरह यहाँ पुरोहितों का शासन नहीं था, हालांकि प्रसिद्ध इतिहासकार ए. एल. बाशम महोदय यहाँ पुरोहितों का ही शासन मानते हैं। डा. आर. एस. शर्मा के अनुसार सिन्धु सभ्यता के लोगों ने सबसे अधिक ध्यान वाणिज्य और व्यापार की ओर दिया।

अतः हड़प्पा का शासन सम्भवतः वणिक वर्ग के हाथों में था। यह भी सम्भव है कि सम्पूर्ण क्षेत्र कई स्वतन्त्र राज्यों, राजवाड़ों में बंटा हुआ था और उनमें से प्रत्येक की एक अलग राजधानी थी जैसे सिन्धु में मोहनजोदड़ों, पंजाब में हरियाणा, राजस्थान में कालीबंगा और गुजरात में लोथल इस संदर्भ में उल्लेखनीय है। कि ई.पू. प्रथम सहस्राब्दी में यद्यपि सम्पूर्ण उत्तर भारत में पुरातात्विीय संस्कृति लगभग एक समान थी फिर भी सम्पूर्ण क्षेत्र 16 स्वतन्त्र महाजनपदों में विभाजित था जिनकी अपनी अपनी राजधानियाँ थीं।

परमार वंश का प्रसिद्ध शासक आप किसे मानते हैं।

कुछ अन्य इतिहासकार जैसे हंटर के अनुसार यहाँ की शासन व्यवस्था जनतांत्रिक पद्धति से चलती थी। मैके के अनुसार हड़प्पा सभ्यता में जन प्रतिनिधि का शासन था। स्टुअर्ट पिग्गट ने इस सभ्यता की जुड़वाँ राजधानियों हड़प्पा और मोहनजोदड़ों के होने का अनुमान लगाया है।

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