गुप्तकालीन मन्त्रीमण्डल (मंत्रि परिषद) का गठन और उसके कार्यों को निरूपित कीजिए।

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गुप्तकालीन मन्त्रीमण्डल का गठन – कालिदास ने गुप्तकालीन मन्त्रिपरिषद का उल्लेख किया है। मन्त्री सामान्यतः उच्च कुल से नियुक्त किए जाते थे। उनका पद वंशानुगत होता था। उनका मुख्य कार्य विभिन्न विभागों की देखभाल करना एवं राजा को सलाह देना था। गुप्तकालीन मन्त्रियों का चयन राजा द्वारा उनकी योग्यता के आधार पर सामन्तों, राजकुमारों एवं उच्च अधिकारियों द्वारा किया जाता था। मन्त्रियों के लिए मंत्रिन् तथा सचिव शब्द प्रयुक्त किया जाता था। कभी-कभी एक मन्त्री को एक से अधिक विभागं सौंपे जाते थे।

वैदिक कालीन सिंचाई व्यवस्था पर एक निबन्ध लिखिए।

समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति से ज्ञात होता है कि हरिषेण एक ही साथ कुमारमात्य, सन्धिविग्रहिक एवं महादण्ड नायक का काम करता था। गुप्तकालीन मंत्रिपरिषद में अनेक प्रशासनिक अधिकारी (अमात्य) भी रहते थे जिनमें महादण्ड नायक, सन्धिविग्राहक, महाप्रतिहार, महाबलाधिकृत, दण्डपारीक, विनयस्थिति स्थापक आदि सम्मिलित थे।

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