ईसाइयों में जीवन साथी का चुनाव किस प्रकार होता है?

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ईसाइयों में जीवन साथी का चुनाव – ईसाइयों में धार्मिक रूप से 13 वर्ष की लड़की और 16 वर्ष के लड़के को विवाह की स्वीकृति प्राप्त है, किन्तु वर्तमान में विवाह देरी से हो रहे हैं। एस. के. गुप्ता ने अपने अध्ययन के आधार पर बताया है कि 52.5% ईसाई विवाह 21 से 25 वर्ष की आयु के बीच और 17.5% 30 वर्ष से अधिक आयु के बीच सम्पन्न किये गये तथा 20 वर्ष से कम की आयु में कोई भी विवाह नहीं पाया गया। अतः स्पष्ट है कि ईसाईयों में प्रायः 20 वर्ष से अधिक आयु के लड़के लड़कियों के ही विवाह सम्पन्न होते हैं। इस प्रकार ईसाईयों में बाल-विवाह नहीं पाया जाता।

ईसाईयों में रक्त सम्बन्धियों को छोड़कर शेष सभी से विवाह किये जा सकते हैं। उदाहरणार्थ- चचेरे, ममेरे भाई-बहिनों में विवाह नहीं हो सकता है। पर इस प्रकार के विवाह बिल्कुल होते ही नहीं हैं ऐसी बात नहीं है। विशेष परिस्थितियों में ऐसे विवाहों को भी समाज स्वीकार कर लेता है। इनमें विधवा विवाह का निषेध नहीं है। ईसाइयों में हिन्दुओं के समान ‘दहेज’ या ‘कन्या मूल्य’ और मुसलमानों के समान ‘मेहर’ का प्रचलन नहीं है। जहां तक जीवन साथी के चुनाव का प्रश्न है तो ईसाइयों में यह चुनाव अधिक स्वतन्त्र वातावरण में होता है।

सामाजिक सर्वेक्षण का अर्थ व परिभाषा बताइए।

‘मसीह आवाज में कहा गया है कि हमारे युवक-युवतियों को अपने माता-पिता की सहायता लेना चाहिए। युवावस्था में स्वाभिमान और बलिदान का भाद बहुत होता है। युवक प्रेम को अपना ध्येय बना लेते हैं, जिसके सामने वे गृहस्थी, समाज, धर्म और जाति के सम्बन्धों को भी कुछ नहीं समझते। कोई ऐसा विशेष कारण भी नहीं है कि विवाह के सम्बन्ध में युवक अपने माता-पिता की सम्पत्ति न लें या उन पर विश्वास न करें। ईसाईयों में लड़के-लड़कियों के चुनाव में माता-पिता की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है परन्तु बदलते परिवेश में माता-पिता भी प्रायः अपने बेटे-बेटियों द्वारा चुने गये जीवन साथी को समर्थन दे देते हैं।

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