दोआब में कर वृद्धि पर विस्तार से लिखिये। इसके असफल होने के क्या कारण थे?

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दोआब में कर वृद्धि – मुहम्मद बिन तुगलक एक योग्य, बुद्धिमान, दयालू व्यसनों से रहित और सुसंस्कृत व्यक्ति था। वह अपने साम्राज्य और प्रजा का विकास चाहता था। लेकिन उसकी अधिकांश योजनाएँ समय के अनुकूल न होने के कारण सफल न हो सकी। उसकी असफल योजनाओं में दोआब में की गयी कर वृद्धि भी थी। इस योजना में सुल्तान को न केवल असफलता हाथ लगी बल्कि राजकोष के अपार धन की भी हानि उठानी पड़ी।

दोआब में कर वृद्धि के कारण

मुहम्मद बिन तुगलक की कई महत्वकांक्षी योजनाएं थीं जिसके लिए अत्यधिक धन की आवश्यकता थी राजकोष में धन की कमी थी क्योंकि सत्ता प्राप्ति के बाद अपना समर्थन प्राप्त करने के लिए सुल्तान बहुत अधिक धन लोगों में बांट चुका था अतः उसने विचार किया कि आवश्यक धन कृषकों पर कर लगाकर प्राप्त किया जा सकता है। उस समय दोआब का भू-भाग दिल्ली सल्तनत का सर्वाधिक उर्वर तथा समृद्धिशाली क्षेत्र था। अतः सुल्तान ने उचित समझा कि यदि वहाँ पर अधिक मात्रा में कर लगाया गया, तो वहाँ के कृषक बढ़े हुये करो को अदा करने में आना कानी या विरोध नहीं करेंगे। यह कर वृद्धि कितनी थी, इस विषय में विद्वानों में मतभेद है। कुछ का मत है कि यह

वृद्धि दस प्रतिशत से बीस प्रतिशत थी जबकि दूसरे दस से बीस गुना मानते हैं। इतिहासकार परिश्ता के अनुसार यह वृद्धि तीन गुना थी सत्यता जो भी हो लेकिन इस कर वृद्धि से किसानों को अत्यधिक कष्ट हुआ और वे पलायन को मजबूर होने लगे। दोआब में कर वृद्धि सुल्तान की प्रतिक्रियावादी नीति का परिणाम न थी। कोई भी इतिहासकार सुल्तान की जनता के प्रति सद्इच्छा में अविश्वास करता नहीं दिखाई पड़ता तथा इसका प्रमाण यह है कि जब मुहम्मद तुगलक को दोआब की वस्तुस्थिति का ज्ञान हुआ, तो उसने अविलम्ब यहाँ राहत पहुंचाने के लिए व्यापक प्रबंध करने के आदेश जारी कर दिये। उसने वहाँ पर कर वसूली बंद करा दी। दोआब के निवासियों को बीज, खाद, आदि उपलब्ध कराये तथा सिंचाई हेतु कुयें भी निर्मित कराये। इससे स्पष्ट है कि सुल्तान की कर वृद्धि की योजना दोआब के कृषकों के प्रति प्रतिक्रियावादी नहीं थी और उसकी धन प्राप्ति का एक माध्यम मात्र थी।

कर वृद्धि का परिणाम

दोआब में कर वृद्धि का परिणाम घातक सिद्ध हुआ। इस कर वृद्धि ने किसानों को भयभीत कर दिया और उन्होंने दोआब से पलायन प्रारम्भ शुरू कर दिया। कारण यह था कि पिछले सात वर्षों से दोआब अकाल की गिरफ्त में था, सिंचाई के श्रोत निरर्थक हो चुके थे, ऐसी स्थिति में कर की वृद्धि ने उन्हें और अधिक परेशान कर दिया। दूसरी ओर सरकारी कर्मचारियों ने भी कर वसूली में अत्यन्त कठोरता का व्यवहार किया। जनता में चारो ओर हाहाकार मच उठा। ऐसे में सुल्तान कृषकों के विरोध को विद्रोह तथा असहयोग मानकर स्वयं ही उत्पीड़क बन बैठा। जब तक मुहम्मद तुगलक को वहाँ की वास्तविक स्थिति का पता चला तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अब सुल्तान को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने बड़े पैमाने पर राहत सामग्री दोआब भेजी। अब भी स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता था, किन्तु लूट-खसोट और भ्रष्टाचार के अभ्यस्त राजकीय कर्मचारियों ने कृषकों के लिए भेजी गयी राहत और सहायता राशि को स्वयं ही हड़पना शुरू कर दिया। अतः स्वाभाविक था कि दोआब की जनता इन सबके लिए सुल्तान को ही जिम्मेदार समझने के लिए बाध्य थी।

दोआब में कर वृद्धि की असफलता के कारण

मुहम्मद बिन तुगलक की दोआब में कर वृद्धि की योजना पूर्णतः असफल सिद्ध हुई। इस योजना की असफलता के लिए जिम्मेदार कारण निम्नलिखित थे-

(1 ) दोआब में सूखा पड़ जाना

जिस समय दोआब में सुल्तान ने कर वृद्धि की उस समय दोआब लगातार कई वर्षों से सूखे की स्थिति से गुजर रहा था और अनेक स्थानों पर अकाल की सी स्थिति हो गयी थी। ऐसे में दोआब के कृषकों को दोहरी मार पड़ी। एक ओर वे अकाल से जूझ रहे थे, दूसरी ओर कर की भारी धनराशि की देनदारी भी थी। अंततः कुछ किसान घबराकर दोआब छोड़कर अन्यंत्र पलायन कर गये तथा कुछ विवश होकर चोरी डकैती करने लगे। इसके कारण राज्य में अव्यवस्था एवं अशांति फैल गयी तथा कर वृद्धि योजना असफल हो गयी।

(2) कठोरता से कर वसूली

कर वसूलने वाले अधिकारियों ने कठोरता से कर वसूलने का प्रयास किया जिसके कारण कई स्थानों पर विद्रोह हुये। सुल्तान ने संपूर्ण परिस्थितियों का आंकलन किये बगैर ही बड़ी कठोरता से विद्रोहों को दबाया। इतिहासकार, बनी के शब्दों में “हजारों व्यक्ति मारे गये और जब उन्होंने बचने का प्रयास किया तब सुल्तान ने विभिन्न स्थानों पर आक्रमण किये तथा जंगली जानवरों की भांति उन्हें अपना शिकार बनाया।” यदि सरकारी कर्मचारियों कृषकों से उदारता का व्यवहार करते तो सम्भवतः कर वृद्धि की नीति असफल न होती।

(3) सुल्तान को सही स्थिति का ज्ञान न होना

सुल्तान को दोआब के लोगों की दशा का ज्ञान बहुत देर में हुआ और तब तक दोआब के लोगों की स्थिति बहुत अधिक खराब हो चुकी थी। यदि सुल्तान को सही समय पर वस्तु स्थिति का पता चल जाता तो शायद स्थिति इतनी भयावाह न होती।

( 4 ) यातायात की समस्या

सुल्तान का साम्राज्य अत्यधिक विस्तृत था तथा आवागमन के साधनों का अभाव था। इसका परिणाम यह हुआ कि सुल्तान को वहाँ के लोगों की सहायता में विलम्ब हुआ। इस वजह से दोआब की जनता मुहम्मद तुगलक की विरोधी हो गयी और विद्रोह पर उतर आयी।

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( 5 ) योग्य अधिकारियों का अभाव

दोआब में कर वृद्धि असफल होने का एक कारण योग्य अधिकारियों का अभाव भी था। प्रथम तो सुल्तान ने यही बहुत बड़ी भूल की कि सम्पूर्ण स्थितियों का विश्लेषण किये बगैर कर वृद्धि कर दी तथा द्वितीय भूल उसने यह किया कि इसको वसूलने के लिए अयोग्य व्यक्तियों को लगाया। इन अधिकारियों ने अविवेक से कार्य लिया और इसके लिए अत्यन्त कठोरता का व्यवहार किया। यदि अधिकारियों ने सूझ बूझ से कार्य किया होता तो स्थिति इतनी गंभीर न होती।

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