चचनामा का ऐतिहासिक महत्व बताइए।

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चचनामा का ऐतिहासिक महत्व- यह पुस्तक 711-12 ई. में सिन्ध पर अरब आक्रमण के समय, वहाँ के मूल राजवंशों का इतिहास जानने का सबसे प्रामाणिक श्रोत है। यह पुस्तक अरबी भाषा में। लिखी गयी है। इसके लेखक के विषय में कोई निश्चित जानकारी प्राप्त नहीं है। सम्भवतः इसका लेखक मुहम्मद बिन कासिम के सैनिक खेमें में आया था। उसने अपनी रचना का नाम, चचनामा, सिन्ध के राजवंश के संस्थापक चच के नाम पर रखा था। शूद्र राजवंश के अन्तिम शासक राय साहसी द्वितीय की मृत्यु के पश्चात सत्ता पर उसके ब्राह्मण मंत्री चच के अधिकार कर था।

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चच किसी शैलज का पुत्र था और उसने सातवीं शताब्दी के अन्तिम पच्चीस वर्षो में सत्ता पर अधिकार किया था, चच ने अपने शासक राय साहसी की विधवा रानी से विवाह कर लिया था, जिससे उसको अपनी सम्प्रभुता स्थापित करने में सुविधा हो जाये उसके पुत्र और उत्तराधिकारी दाहिर ने लगभग 708 ई. में सत्ता ग्रहण की थी। उसने ही सिन्ध पर अरबों के आक्रमण का सामना किया था और इसमें उसके पूरे परिवार का अन्त हो गया था।

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