चार्ल्स पंचम कौन था? एक वंशानुगत शासक के रूप में चार्ल्स पंचम की समस्याओं का वर्णन कीजिए।

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चार्ल्स पंचम कौन था? – स्पेन का हैप्सवर्ग साम्राज्य चार्ल्स पंचम को उत्तराधिकारी के रूप में सन् 1520 ई. में प्राप्त हुआ किन्तु यह विशाल साम्राज्य कांटों की सेज से कम भी नहीं था। चार्ल्स पंचम को जितना विशाल साम्राज्य प्राप्त हुआ था उतना ही उत्तरदायित्व भी बढ़ गया था। उसका विशाल साम्राज्य ही उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती थी। उसके विशाल साम्राज्य की विस्तृत सीमायें एवं प्रादेशिक भिन्नता उसकी प्रमुख समस्या थी। वास्तव में चार्ल्स पंचम का साम्राज्य तो एक राज्यवंशीय साम्राज्य था जो कि अनेक राज्यों व प्रदेशों का सुसम्बद्ध समूह था। इतिहासकार ‘हज’ के शब्दों में, इससे प्राचीन समय के रोमन साम्राज्य या पश्चात् के रूसी साम्राज्य के सदृश एक केन्द्रीय सरकार नहीं थी, अपितु यह वैवाहिक सम्बन्धों के कारण एक विशेष राजवंश हैप्सवर्ग राजवंश के अधीन अनेक राज्यों व प्रदेशों का असम्बद्ध समूह था।

प्रत्येक प्रान्त की अलग एवं स्वतंत्र शासन व्यवस्था थी। यह ठीक है कि जर्मनी में नाममात्र की केन्द्रीय व्यवस्था थी परन्तु स्पेन, नीदरलैण्ड एवं इटैलियन राज्यों में तो यह नाममात्र के लिए भी नहीं थी। जहां एक ओर नीदरलैण्ड में आने वाले सभी प्रान्त अपना-अपना अलग अस्तित्व एवं स्वतंत्रता रखते थे वही दूसरी ओर स्पेनिस साम्राज्य में भी विभिन्न प्रान्तों की शासन व्यवस्था अलग-अलग थी। स्पेनी एवं इटैलियन वर्गीयता जहां उसके लिए गम्भीर चुनौती थी तो पवित्र रोमन साम्राज्य होने के नाते उसका उत्तरदायित्व अत्यधिक बढ़ गया था। हैप्सबर्ग की फ्रांस के साथ भी शत्रुता थी जिसके निम्न कारण थे

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(i) चार्ल्स पंचम एवं फ्रांसीसी नरेश फ्रांसिस प्रथम दोनों ही पवित्र रोमन साम्राज्य के सम्राट के पद के दावेदार थे। इस प्रतिद्वन्द्विता में चार्ल्स पंचम विजयी हुआ। अतः फ्रांसिस प्रथम की पराजय दोनों के मध्य शत्रुता का कारण बन गयी।

(ii) हैप्सबर्ग साम्राज्य की विशालता के कारण फ्रांसीसी साम्राज्य की सीमाएं हैप्सबर्ग साम्राज्य से चारों ओर से घिरी थी। यह फांस की सुरक्षा की दृष्टि से अत्यन्त घातक था। फांसिस प्रथम हैप्सबर्ग वंश को चुनौती देकर अपने साम्राज्य को सुरक्षित करना चाहता था।

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(iii) दोनों राजवंशों की शत्रुता परम्परागत रूप से चली आ रही थी।

(iv) दोनों शासक नेपल्स एवं सिसली पर अपना-अपना अधिकार बताते थे। चार्ल्स पंचम मिलान पर जिसे कि फ्रांसिस प्रथम ने अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया था अपना अधिकार स्थापित करना चाहता था। इधर फ्रांसिस प्रथम नावोर के दक्षिणी प्रान्तों पर अधिकार करना चाहता था।

स्पष्ट है कि दोनों राजवंशीय साम्राज्यों के मध्य युद्ध उक्त परिस्थितियों में आवश्यम्भावी था। इसके अतिरिक्त जर्मनी में तीव्रगति से फैलने वाला धर्म-सुधार आन्दोलन चार्ल्स पंचम के सम्मुख एक गम्भीर चुनौती था। इसी प्रकार आन्तरिक क्षेत्र में चार्ल्स को आर्थिक, राजनीतिक एवं धार्मिक समस्याओं का सामना करना पड़ा जो कि उसके लिए अत्यन्त गम्भीर परिस्थिति थी।

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