चालुक्यों के आरम्भिक इतिहास का वर्णन कीजिए।

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चालुक्यों के आरम्भिक इतिहास

चालुक्य अथवा सोलंकी अग्निकुत से उत्पन्न राजपूतों में से एक थे। वाडनगर लेख में इस वंश की उत्पत्ति ब्रह्मा के चुलुक अथवा कमण्डलु से बताई गयी है। उन्होंने गुजरात में दसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध से तेरहवीं शताब्दी के प्रारम्भ तक शासन किया। उनकी राजधानी अन्हिलवाड़ में थी। यह निश्चित नहीं है कि दक्षिण के चालुक्य वंश से इसका कोई सम्बन्ध था या नहीं। उल्लेखनीय है कि दक्षिण के वंश का नाम ‘चालुक्य’ था जबकि गुजरात के वंश को ‘चीतुक्य’ कहा गया है। इस वंश के शासक जैन धर्म के पोषक तथा संरक्षक थे।

अन्हिलवाड़ के चालुक्यों के उदय के पूर्व गुजरात का इतिहास सामान्यतः कन्नौज के गुर्जर प्रतिहारों से सम्बन्धित है। प्रतिहार महेन्द्रपाल का साम्राज्य गुजरात तक विस्तृत था तथा उसके उत्तराधिकारी महीपाल ने भी कम से कम914 ई. तक यहाँ अपना अधिकार बनाये रखा। महीपाल को राष्ट्रकूट शासक इन्द्र तृतीय (915-17 ई.) द्वारा पराजय के पश्चात् प्रतिहारों की स्थिति निर्बल पड़ गयी। राष्ट्रकूटों के साथ अनवरत संघर्ष के परिणामस्वरूप गुजरात क्षेत्र भारी अराजकता एवं अव्यवस्था का शिकार हो गया। प्रतिहारों तथा राष्ट्रकूटों के पतन के उपरान्त चौलुक्यों को गुजरात मे अपनी सत्ता स्थापित करने का सुअवसर प्राप्त हो गया।

“गोविन्द चन्द्र गहड़वाल वंश का सर्वाधिक योग्य शासक था।” व्याख्या कीजिए।

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