बुद्धि क्या है? समझाइये ।

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बुद्धि का अर्थ

बुद्धि का अर्थ बताते हुए स्टर्न ने परिभाषित किया है कि “बुद्धि एक व्यक्ति की सामान्य क्षमता है, जिसके द्वारा यह चेतनापूर्वक अपने विचारों को नवीन आवश्यकताओं से समायोजित करता है, यह नई समस्याओं तथा जीवन की परिस्थिति के प्रति सामान्य मानसिक ग्रहणशीलता है।”

परन्तु स्टर्न की इस परिभाषा ने नई समस्यायें उत्पन्न कर दी। उदाहरण के लिए, ग्रहणशीलता (Adaptability) क्या है? यह एक प्रक्रिया है जिसे सूक्ष्मता से नहीं मापा जा सकता है। स्टर्न के उपरान्त अनेक मनोवैज्ञानिकों ने बुद्धि की परिभाषा विभिन्न प्रकार से दी। इस प्रकार बुद्धि की परिभाषा से सम्बन्धित तीन स्पष्ट विचारधाराएं प्रकट हो गयी

  1. कुछ इसे सीखने की क्षमता (Capacity of Learn) मानते थे,
  2. कुछ इसे भावात्मक सम्बोध (Abstract Concept) मानने लगे, तथा
  3. कुछ इसे समस्या समाधान की योग्यता मानने लगे।

परन्तु इन विचारधाराओं के कारण ‘जनरल ऑफ एजूकेशनल माइकोलॉजी’ (Journal of Educational Psychology) को बाध्य होकर एक वृहत गोष्ठी (Symposium) की व्यवस्था करनी पड़ी। इसमें बुद्धि की प्रकृति तथा मापन पर विचार-विमर्श हुए। इस वृहत गोष्ठी ((Symposium) में बुद्धि की विभिन्न परिभाषाएं दी गयी। टरमैन (Terman) ने अपनी परिभाषा में कहा, ‘अमूर्त विचारों के अनुरूप चिन्तन किया ही व्यक्तियों की बुद्धि कहलाती है। टरमैन ने आगे कहा- दो मानसिक विभिन्नतायें व्यक्तियों की सम्बोध (Concept) निर्माण योग्यता तथा सम्बोधों को दुरूह स्थितियों में प्रयोग करने की क्षमता पर निर्भर करती है।’ इस गोष्ठी में 16 मनोवैज्ञानिकों ने भाग लिया तथा सभी ने अपने विचार प्रकट किये।

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‘बुद्धि सीखने की क्षमता है-ऐसे विचार बकिंघम (Buckingham) डियरबोर्न (Dearborn) इत्यादि ने प्रकट किये। ‘बुद्धि समायोजन क्षमता है’, इस प्रकार के विचार काल्विन (Colvin) पेटर्सन (Paterson) इत्यादि मे दिये तथा हैगर्थी (Haggarthy), पर्स्टन (Thurston) ने कहा कि बुद्धि अनेक तत्वों का समय है। किन्तु सब ने एकमत होकर यह स्वीकार किया कि ‘बुद्धि एक अत्यन्त जटिल घटक (Phenomenon) है।’

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