भारतीय शिक्षा आयोग, 1882 का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

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भारतीय शिक्षा आयोग, 1882 ई० भारतीय शिक्षा की जांच के लिए लॉर्ड रिपन ने 3 फरवरी, 1882 ई० को विलियम हण्टर की अध्यक्षता में 20 सदस्यों की एक समिति नियुक्त की, जिसने 10 माह के पक्षात् एक रिपोर्ट प्रस्तुत की और अपनी संस्तुतियाँ दीं, जिनमें से प्रमुख इस प्रकार हैं- (अ) आयोग ने प्राथमिक शिक्षा की ओर विशेष ध्यान दिया। उसने यह सुझाव दिया कि प्राथमिक शिक्षा जीवनोपयोगी हो, वह मातृभाषा के माध्यम से दी जाय, वह स्थानीय संस्थाओं द्वारा संगठित की जाय, प्राथमिक अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए विद्यालय खोले जायें और पाठ्यक्रम व्यावहारिक हो। (आ) आयोग ने देशी विद्यालयों और भारतीय ज्ञान का पोर खण्डन किया और अंग्रेजी के माध्यम से पाश्चात्य ज्ञान-विज्ञान के प्रसार तथा इन्हीं पर धन व्यय करने की बात का बड़ी उपता से समर्थन किया। उसके तर्कों से प्रभावित होकर लाई विलियम बेण्टिक ने 7 मार्च, 1885 ई० को आज्ञा पत्र जारी करते हुए लॉर्ड मैकाले की संस्तुतियों को स्वीकार कर लिया।

अनौपचारिक शिक्षा की विशेषताएँ लिखिए।

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